जानें होलिका दहन का महत्व, पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त के लिए पढ़ें खबर

आस्था जानकारी

 फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है, ऐसे में इस साल होलिका दहन 17 मार्च किया जाएगा। होलिका दहन पर शुभ मुहूर्त रात्रि 7 बजे से 10 बजकर 16 मिनट तक शुभ मुहूर्त होगा। इसके लिए अगले दिन 18 मार्च को होली खेली जाएगी। ज्योतिषाचार्य पंडित नीरज भारद्वाज ने बताया कि फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिया को होलिका दहन पर्व मनाया जाता है। वहीं इसके अगले दिन यानि चैत्र मास की प्रतिपदा को रंगों की होली मनाई जाती है। जिसमें सभी एक दूसरे को रंग लगाकर भाईचारे की मिसाल देते है।

पूजा से मिलेगा फायदा, होलिका दहन रात्रि 7 बजे से 10 बजकर 16 मिनट पर शुभ मुहूर्त

पंडित नीरज भारद्वाज ने बताया कि होलिका की पूजा राशियों के अनुकूल करें। इससे काफी फायदा होगा। इसके लिए मेष और वृश्चिक राशि के लोग गुड़ की आहुति दें। वृष राशि वाले चीनी की आहुति दें। मिथुन और कन्या राशि के लोग कपूर की आहुति दें। कर्क के लोग लोहबान की आहुति दें। सिंह राशि के लोग गुड़ की आहुति दें। तुला राशि वाले कपूर की आहुति दें। धनु और मीन के लोग जौ और चना की आहुति दें। मकर व कुंभ वाले तिल को होलिका दहन में डालें। होली पर होलिका पूजन की विशेष परंपरा है। होलिका पूजन कई प्रकार की बाधाओं को दूर कर जीवन में सुख समृद्धि लाती है।

ऐसे करें पूजा

उन्होंने बताया कि होलिका पर होलिका पूजन की सामग्री विशेष होती है। पूजन में गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमाएं बनाते हैं। इसके साथ ही फूलों की माला, रोली, फूल, कच्चा सूत, हल्दी, मूंग, मीठे बताशे, गुलाल, रंग, सात प्रकार के अनाज, गेहूं की बालियां, होली पर बनने वाले पकवान, मिष्ठान आदि के साथ होलिका का पूजन किया जाता है। होली का पूजन पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुख करके करना चाहिए।

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