जब्त शराब की रिपोर्ट में मिथाइल अल्कोहल आते ही बढ़ जाती है थानेदार की परेशानी, जानें इसकी वजह

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पिछले महीने नकली शराब पीने से मौत की बात सामने आने के बाद पुलिस काफी सतर्क दिख रही है। घटना के बाद विभिन्न थाना क्षेत्रों में जब्त की गई शराब की लैब रिपोर्ट तलब की जा रही है। वरीय अधिकारी रिपोर्ट मांग रहे हैं ताकि पता चल सके कि जब्त शराब में कौन असली और कौन नकली है। स्थिति यह है कि जब्त शराब की रिपोर्ट में मिथाइल अल्कोहल होने की बात सामने आते ही संबंधित थानेदार की परेशानी बढ़ जाती है क्योंकि फिर उस खेप से संबंधित अनुसंधान और कार्रवाई भी अलग तरीके से करनी होती है। गौरतलब है कि नकली शराब में भी मिथाइल अल्कोहल होने की आशंका जताई गई थी। मिथाइल अल्कोहल ही उसे जहरीली बना देता है।

घटना होने के बाद पुलिस मुख्यालय भी गंभीर दिख रहा 

भागलपुर जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में नकली शराब पीने से लोगों की मौत की बात सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय भी गंभीर हो गया है। होली से पहले समीक्षा में भागलपुर पहुंची आईजी केएस अनुपम ने भी आशंका जताई थी कि नकली शराब बनाने में मिथाइल अल्कोहल का इस्तेमाल हो सकता है। उन्होंने इसको लेकर कार्रवाई के लिए कई बिंदुओं पर निर्देश दिया था।

भागलपुर में होली से पहले और होली के बाद नकली शराब पीने से मौत की बात सामने आई थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नकली शराब बनाने वाले अंतरराज्यीय तस्करों को झारखंड से गिरफ्तार किया था। यही वजह है कि नकली शराब की बात सामने आने पर उस खेप की तह तक जाने की कोशिश पुलिस कर रही है। जहां से वह खेप लाई गई है उन जगहों पर छापेमारी के लिए पुलिस पहुंच रही है।

इथाइल और मिथाइल अल्कोहल में यह है फर्क

इथाइल अल्कोहल का प्रयोग शराब बनाने में की जाती है। इसके लिए इसकी तीव्रता घटानी पड़ती है। इसी तरह का दूसरा पदार्थ मिथाइल अल्कोहल है, जो जहर का दूसरा रूप है। चूंकि, दोनों का मिलता-जुलता नाम है और ‘अल्कोहल’ शब्द भी जुड़ा है, इसलिए लोग भ्रम में मिथाइल अल्कोहल में पानी मिलाकर इसका शराब की जगह प्रयोग कर लेते हैं। ऐसा करने पर वह शराब जहरीली हो जाती है और उसे पीने वाले अपनी जान गवां देते हैं।

मार्च महीने में जिले में संदिग्ध परिस्थिति में कई लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें कुछ मामले में मृतक के परिजन और बीमार ने कहा था कि शराब पीने से उनकी तबीयत बिगड़ी थी। डीआईजी सुजीत कुमार का कहना है कि कहीं भी शराब की खेप पकड़े जाने के बाद उसके सैंपल को जांच के लिए भेजा जाता है। थानेदार उसकी रिपोर्ट सौंपते हैं।

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