बिहार के इस आईपीएस को इतिहास से है गहरा लगाव, बेहतर पुलिसिंग के लिए पूरे देश में हैं पॉपुलर

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बिहार के इस पुलिस अफसर को मिट्टी में मिल जाना मंजूर है मगर अपने स्वाभिमान, ईमानदारी, कर्तव्य और ज़मीर से समझौता करना हरगिज़ मंजूर नहीं| कोई उनके रहते कानून तोड़े, चाहे वो कितने भी बड़े साहब क्यों न हों, उसे किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं. हम बात कर रहे हैं बिहार के बेगूसराय निवासी ,बिहार कैडर के 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी, भागलपुर और मुंगेर रेंज के डीआईजी विकास वैभव की.

जो पद पर रहते हुए अपने ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठता और बहादुरी से दूसरों के लिए मिसाल कायम कर रहें है. विकास वैभव का नाम उनके कार्य को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहता है. जब वो बगहा के एसपी या, रोहतास के एसपी, या एनआईए में, या पटना एसएसपी रहे हो चाहे अभी भागलपुर और मुंगेर रेंज के डीआईजी हैं. विकास वैभव कानून को लागू कराने में जितने सख्त हैं, उतने ही पब्लिक फ्रेंडली भी हैं. इसी साल चंपारण के बगहा के समरकोला गांव के बीच एक चौराहा का नाम ‘विकास वैभव चौराहा’ किया गया.

दरअसल 2007 में जब विकास वैभव बगहा के एसपी बने थे तब इस इलाके को चंपारण का चंबल कहा जाता था. यह चौराहा तब सुनसान और अपराधियों का अड्डा बना हुआ था. लोग दिन में भी उधर से गुजरने से डरते थे. बगहा में पोस्टिंग के दौरान विकास वैभव ने इस चौराहे के साथ इलाके को अपराधमुक्त बनाया था. तब से इस इलाके में बिहार का यह आईपीएस किसी महापुरुष से कम नहीं है.

बगहा में विकास वैभव चौराहा

पटना के एसएसपी रहते हुए विकास वैभव ने वो कर दिखाया जिसके बारे में सोचने की भी कोई हिम्मत नहीं कर सकता था. अपनी पोस्टिंग के दुसरे दिन ही विकास वैभव ने जदयू के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल तो भेजने के साथ ही उन्होंने एक पुलिस अधिकारी का कर्तव्य निभाते हुए राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव एवं बिहार के वर्तमान शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी के खिलाफ केस दर्ज कर सियासी गलियारों में खलबली मचा दी.

इतना ही नहीं लालू-नीतिश के स्वाभिमान रैली के दौरान लग रहे अवैध पोस्टर बैनर पर एसएसपी ने न सिर्फ रोक लगा दी बल्कि कई नेताओं पर केस भी दर्ज कर डाला. आलम ये था कि लालू और नीतिश की रैली में अब सिर्फ एक दिन बचा था और पटना शहर में रैली के नाम-ओ-निशान नहीं दिख रहे थे. वैभव को पटना पुलिस की कमान मिलने के बाद उनके शानदार कारनामों की बदौलत पटना पुलिस की उपलब्धियों में जबर्दस्त उछाल आया था साथ ही पुलिस की छवि में काफी सुधार देखा गया.

आलम यह था कि अपराधी तो दूर, पुलिस को अपना ग़ुलाम समझने वाले नेताओं को भी पुलिस के पावर का अंदाजा लग गया था और पुलिस से किसी की पैरवी करने से पहले दस बार सोचते थे. एनआईए में रहते हुए विकास वैभव ने कई आतंकी वारदातों की गुत्थियों को सुलझाया है. वर्ष 2013 में पटना के गांधी मैदान में हुए बम ब्लास्ट एवं बोधगया बम ब्लास्ट की जांच टीम की अगुआई कर चुके हैं.

रोहतास में नक्सल के खिलाफ अभियान के बाद तत्कालीन एसपी विकास वैभव और उनकी टीम

इससे पहले विकास वैभव नेपाल बॉर्डर पर नक्सल प्रभावित बगहा में एसपी के रूप में सुनियोजित तरीके से ऑपरेशन और स्थानीय लोगों की मदद से काम कर नक्सलियों को काबू करने में सफलता हासिल की साथ ही रोहतास जिले की कमान मिलने पर वहाँ के घने जंगलों में नक्सलियों के मांद में घुस उनपर हमला कर नक्सलियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया.

विकास वैभव ने रोहतास में नक्सलियों के खिलाफ कई खतरनाक और साहसिक अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जिसके लिए पटना में मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने उन्हें सम्मानित भी किया था.  इन्होंने कई महत्वपूर्ण अभियानों के दौरान हुए अपने अनुभवों को अपने ब्लोग में लिखा भी है (copinbihar.blogspot.com).

भागलपुर और मुंगेर रेज के डीआईजी के रूप में भी वैभव जनता के अधिकारी बने हुए दिख रहे हैं परिणाम फरियादियों की सबसे अधिक संख्या उनके पास है. लोगो का भरोसा, त्वरित कार्रवाई का और त्वरित करवाई भी होता है. फरियादियों के लिए विकास वैभव का दरवाजा सदैव खुला है.

भागलपुर में फरियाद सुनते डीआईजी विकास वैभव

विकास वैभव को चुनौतियों से लड़ना पसंद है तो इतिहास से हमेशा रूबरू होना उनका शौक. विकास वैभव जहाँ भी जाते हैं वहाँ के इतिहास को खंगालने की कोशिश करते हैं. वैभव ‘साइलेंट पेजेज’ नाम के एक ब्लॉग भी चलाते हैं, जिसमें वह बिहार के साथ-साथ देश के कई जगहों के बारे में लिखते हैं और साथ ही सोशल साइटों पर अपने पेजेज  के माध्यम से ऐतिहासिक स्थलों की खूबसूरत व् अनदेखी तस्वीरें और उसके बारे में रोचक जानकारियाँ भी लोगों के साथ शेयर करते है.

वैभव ने बताया कि बिहार के रोहतासगढ़ और कैमूर हिल घूमने में उन्हें बेहद अच्छा लगता है। वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ घूमना पसंद करते हैं. उनके परिवार को पहले इतना घूमना पसंद नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे उनका मन लगने लगा. वह कहते हैं कि उन्हें बचपन से ही इतिहास में दिलचस्पी रही है. ये बात अलग है कि दसवीं तक ही उन्होंने इतिहास की पढ़ाई की लेकिन उनकी इतिहास को जानने की इच्छा उसके बाद भी बनी रही. उनका मानना है कि भारत को जीवित रखने के लिए उसके इतिहास को जिंदा रखना बेहद जरूरी है.

विकास वैभव जैसे अधिकारी अपनी बहादुरी और ईमानदारी के लिए जाने जाए जाते हैं. वे कागज पे नहीं जमीनी स्तर पे काम करने वाले अफ़सर हैं जिसे चुनौतियों से लड़ना पसंद है. विकास वैभव जैसे अधिकारी जहाँ भी रहेंगे, अपनी जिम्मेदारियाँ बखूबी निभाते रहेंगे.

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