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मिसाल हैं बिहार के IPS राज्यवर्धन शर्मा, 10 वर्षों से कोमा में हैं पत्नी, सेवा के बूते जिंदा रखा

एक बिहारी सब पर भारी

बिहार में एक ऐसे रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी हैं जिनकी कोमा में पड़ी पत्नी के लिए , उनके द्वारा पत्नी की अहर्निश की जा रही सेवा वेलेंटाइन-डे मनाने के पीछे का असली मकसद बताती है. ये नई पीढ़ी के युवाओं और युवा दंपत्तियों के लिए एक प्रेरणा और उदाहरण भी है.

ये अधिकारी हैं 1980 बैच के बिहार कैडर के रिटायर्ड आईपीएस राज्यवर्धन शर्मा. पुलिस विभाग में रहते हुए राज्यवर्धन शर्मा को एक कड़क पर ईमानदार छवि वाला अधिकारी माना जाता रहा.

लेकिन इस अधिकारी के सीने में कितना दर्द छिपा है यह कोई नहीं जानता. यहां तक कि आजतक उन्होंने अपना व्यक्तिगत दर्द और व्यक्तिगत परेशानियों को भी किसी से शेयर नहीं किया.

पटना में ही पदस्थापना के दौरान वर्ष 2007 में राज्यवर्धन शर्मा की धर्मपत्नी को पैरालाइसिस अटैक हुआ जिसके कुछ दिन बाद ही वह कोमा में चली गर्इं. उस वक्त राज्यवर्धन शर्मा के एकमात्र पुत्र व पुत्री अमेंरिका में पढ़ाई कर रहे थे.

बच्चों की पढ़ाई डिस्टर्ब नहीं हो , इस कारण राज्यवर्धन शर्मा तब बच्चों को इसकी कोई जानकारी दिए बिना इस विश्वास के साथ पत्नी की सेवा में जुटे रहे कि आज न कल वो ठीक हो जाएगी.
पटना के जोनल आईजी सहित कई प्रमुख पदों पर रहने और सरकारी काम के बोझ के वावजूद पत्नी सेवा राज्यवर्धन शर्मा की दिनचर्या बनी रहीं. सुबह उठकर बिछावन पर ही कोमा में पड़ी अपनी पत्नी को नित्यकर्म से फारिग करवाना, उनका मुंह हाथ धोकर पाइप के सहारे पेट तक तरल पदार्थ पहुंचाने के बाद ही राज्यवर्धन शर्मा कार्यालय के लिए निकलते रहे.
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दोपहर लंच टाइम और शाम में वापस आवास आने के बाद उनका अधिकांश समय पत्नी की सेवा में ही बीतता रहा. पत्नी को कोमा में रहते हुए राज्यवर्धन शर्मा ने अमेरिका में लेक्चरर अपने पुत्र और वहीं चिकित्सक अपनी बेटी की शादी पटना से की पर दुर्भाग्य कि कोमा में पड़ी उनकी पत्नी न तो अपनी बहू के बारे में कुछ जान सकीं और न ही दामाद के बारे में. न ही उनका चेहरा देख सकीं.

राज्यवर्धन शर्मा की पत्नी आज भी उसी स्थिति में हैं जिस स्थिति में वह दस साल पूर्व थीं. पर एक पति के रुप में राज्यवर्धन आज भी अपने दायित्वों का पालन कर रहे हैं.

जब राज्यवर्धन शर्मा को कहीं जाना होता है, तब उनकी बूढ़ी मां अपनी बहू की सेवा करती हैं.

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पिछले दस वर्षों से बिछावन पर ही रह रही उनकी पत्नी और राज्यवर्धन शर्मा बिहार ही नहीं पूरे देश की युवा पीढ़ी के साथ-साथ वैसे दंपत्तियों के लिए भी एक मिसाल हैं, जो सही मायने में ‘वेलेंटाइन’ का अर्थ समझना चाहते हैं.

पिछले दस वर्षों से कोमा में पड़ी एक नेक दिल इंसान की पत्नी अगर आज भी जिन्दा हैं तो उसका कारण है , पति द्वारा की जा रही अनवरत सेवा और पत्नी के प्रति उनका अपार स्नेह और प्यार !

(यह आलेख और फोटो बिहार के जर्नलिस्ट विनायक विजेता के फेसबुक से साभार प्रकाशित किया गया है.)

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