जिंदगी की जंग लड़ रहे साथी को बचाने में जुटे IPS अधिकारी, पेश की अनोखी मिसाल

जागरूकता

पटना: भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों ने अपने एक साथी को बचाने में एकता की अनोखी मिसाल दिखाई है. उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी सुरेंद्र दास को बचाने के लिए भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों ने जी जान लगा दिया है.

इलाज के खर्च की बात हो या फिर एकजुटता दिखाकर साथी के प्रति समर्पण दिखाने की कवायद, IPS अधिकारियों का जज्बा वाकई काबिले तारीफ है. कई IPS अधिकारी मिलकर चार्टर्ड प्लेन से डॉक्टरों को तो मंगा ही रहे हैं साथ ही एक मशीन भी चार्टर प्लेन से मंगाई गई.

16 आईपीएस अधिकारी हुए एकजुट 
सुरेंद्र दास कानपुर में सिटी एसपी के तौर पर पदस्थापित हैं. जहरीला पदार्थ खाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी. उत्तर प्रदेश शासन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से संपर्क कर डॉक्टरों की एक टीम को चार्टर्ड प्लेन से लखनऊ बुलवाया गया. इसके अलावा एक पोर्टेबल एक्मो मशीन भी चार्टर्ड प्लेन से मुंबई से मंगाई गई. दरअसल कानपुर में पोर्टेबल एक्मो मशीन नहीं थी.
मुंबई में यह मशीन उपलब्ध थी और वहां से चार्टर्ड प्लेन से इस मशीन को कानपुर मंगाया गया. चार्टर्ड प्लेन से कुछ ही घंटों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम एक मशीन लेकर कानपुर पहुंच गई तथा उनका इलाज शुरू कर दिया गया. सूत्रों की माने तो गंभीर हालत में रहे IPS अधिकारी सुरेंद्र दास को बचाने के लिए एक्मो मशीन की सख्त आवश्यकता थी. एक्मो मशीन के द्वारा कृत्रिम हृदय और फेफड़े मूल अंगों को आराम देकर उसे सुधारने में मदद करते हैं.
इन आईपीएस अधिकारियों की अनोखी पहल
उत्तर प्रदेश में पदस्थापित लखनऊ इंटेलिजेंस की एसीपी चारू निगम, उत्तराखंड के अधिकारी मंजूनाथ, फतेहपुर की एसपी पूजा यादव, लखनऊ आईजी सुजीत पांडे, लखनऊ एसपी विक्रांत, आईपीएस रवीना त्यागी, आईपीएस सतीश राजीव रावत, अंकित मित्तल सरीखे आईएएस-आईपीएस अधिकारी अस्पताल में भर्ती सुरेंद्र दास के इलाज पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
IPS अधिकारी देंगे 17 लाख का खर्चा
दरअसल सुरेन्द्र दास के इलाज के लिए 16 आईपीएस अधिकारी फिलहाल आगे आए हैं. एक्मो मशीन और डॉक्टरों की टीम को चार्टर प्लेन से मंगाने में 17 लाख का खर्चा आया है. पुलिस मुख्यालय नियमों के आधार पर यह खर्च राशि देने को तैयार नहीं है. मैनुअल में चार्टर्ड प्लेन के लिए राशि भुगतान की व्यवस्था नहीं है. आईपीएस अधिकारियों ने बताया है कि यदि सरकार इस राशि का भुगतान नहीं करेगी तो वे लोग खुद अपने स्तर से इस रकम को अदा कर देंगे.
यह है एक्मो मशीन की खासियत
चिकित्सकों की माने तो एक्मो मशीन काफी संवेदनशील होती है. इसमें कृत्रिम हृदय और फेफड़े होते हैं. कृत्रिम हृदय और फेफड़ों के कारण इसे काफी संवेदनशील माना जाता है. मशीन को मनुष्य के शरीर से जोड़ दिया जाता है तथा जिस मनुष्य से इस मशीन को जोड़ा जाता है उसके हृदय और फेफड़ों का काम यह मशीन ही करती है.
एक्मो मशीन से मरीज के हृदय और फेफड़ों को कुछ देर के लिए आराम मिल जाता है ताकि वह तेजी से रिकवरी कर सकें. मशीन को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना काफी संवेदनशील होता है.
Source: RepublicHindi.Com

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