एनकाउंटर स्पेशलिस्ट हैं IPS दिनेश..अब तक कई कुख्यात बदमाशों को पहुंचा चुके हैं ऊपर

प्रेरणादायक

एक अच्छे पुलिस अफसर से सबको उम्मीद होती है कि वो अपने कर्तव्य का अच्छे से पालन करते हुए लोकसेवा करे। इस तरह से प्रशासन में आने के बाद अगर कोई अधिकारी ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और परानुभूति से कार्य करे रो हर कोई उसको याद करता है। जनता में वो ही अफसर अपना नाम कमाता है। इस तरह के ही एक पुलिस अफसर है IPS दिनेश एम् एन जिनके नाम से अपराधी थर्राते है।

दिनेश एम् एन 1995 बैच के IPS अफसर जो राजस्थान कैडर में काम कर रहे है। देश के तेज तर्रार आईपीएस अफसरों में उनकी गिनती की जाती है। उनकी कार्यशैली कई अभियानों और ऑपरेशन में झलकी है जहाँ से उन्होंने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। उदयपुर और करौली में काफी लम्बे समय तक वो एसपी रहे थे तब अपराधी उनसे खौफ कहते थे।

26 नवंबर, 2005 को हुए सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में आईपीएस दिनेश एमएन सात साल जेल में रह चुके है। सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर फर्जी होने के अंदेशे की वजह से चर्चा में आया था। इसी वजह से दिनेश एम् एन को जेल जाना पड़ा था। यह बहुचर्चित केस अभी भी कोर्ट में लंबित है। गुजरात के इस सबसे हाईप्रोफाइल एनकाउंटर में माफिया और पुलिस के मिलीभगत की बात सामने आई थी। जेल से बाहर आने के बाद सरकार ने एसीबी में उनकी तैनाती की। वहां भी लोगों में उनके नाम का खौफ पैदा हो गया। एसीबी के आईजी रहते हुए दिनेश एमएन ने एडिशनल डायरेक्टर माइनिंग को ढाई करोड़ रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।

राजस्थान में अपराध का पर्याय और खौफ का दूसरा नाम बन चुके आनदपाल सिंह को पकड़ने की जिम्मेदारी आईजी दिनेश एम् एन को दी गयी थी। दिनेश एम् एन ने अपना कार्य एसओजी में काम करते हुए बखूबी निभाया और आनदपाल को ख़त्म करवा दिया। इसके लिए उन्होंने एक टीम बनाकर हरियाणा पुलिस से सहयोग भी लिया था। इस तरह से आईजी दिनेश एम् एन की ईमानदार छवि के सब लोग कायल है। उनकी कार्यशैली पुलिस विभाग में भी सबको पसंद है। सात साल तक जेल में रहने के बाद वापसी करके भी उन्होंने अपना काम करने अंदाज नहीं छोड़ा है।

Sources:-Live News

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