पूर्वी लद्दाख में गालवान घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए हैं। सरकार के सूत्रों से हवाले इस बात की जानकारी मिली है। इस झड़प में बिहार के तीन सपूतों ने भी सीमा की रक्षा करते हुए अपनी जान की कुर्बानी दी। इनमें सारण, भोजपुर और सहरसा का एक-एक लाल शामिल है। 

सुनील कुमार ने सारण की शौर्यपूर्ण मिट्टी की परंपरा को कायम रखा। चीनी सैनिकों के साथ झड़प में उन्होंने डटकर सामना किया और आखिरकार अपनी शहादत दे दी। सुनील बिहार रेजिमेंट के 16 बिहार बटालियन के हवलदार थे। वे सारण जिले के परसा थाना क्षेत्र के दीघरा गांव के रहने वाले थे। उनके पिता सुखदेव राय भी सेना से ही सेवानिवृत्त हुए हैं।

दूसरे शहीद कुंदन ओझा मूल रूप से भोजपुर जिले के बिहिया थाना क्षेत्र के पहरपुर गांव के रहने वाले थे। उनका परिवार झारखंड के साहिबगज में रह रहा है। वहीं, सहरसा जिले की विशनपुर पंचायत के आरण गांव के एक वीर कुंदन कुमार भी दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गए। सारण के एक और सपूत चंचौरा के संजय के भी शहीद होने की चर्चा होती रही। आधिकारिक तौर पर किसी अधिकारी ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

चीन के 43 सैनिकों को भी पहुंचा नुकसान
चीन की क्षति के बारे में सटीक संख्या की जानकारी नहीं है। कहा गया है कि चीन को भी नुकसान का सामना करना पड़ा है। 40 से अधिक सैनिक या तो मारे गए हैं या फिर घायल हैं। इन्हें ले जाने के लिए चीन के कई चॉपर एलएसी के करीब दिखे।

चीन सीमा पर 45 साल बाद सैनिकों की शहादत
इससे पहले 1975 में अरुणाचल में भारत और चीन के सैनिकों के बीच भिड़ंत में चार जवान मारे गए थे। हालांकि सामान्य तौर पर 1967 के सिक्किम में हुए संघर्ष को दोनों देशों के बीच आखिरी खूनी संघर्ष के तौर पर माना जाता है। तब सीमा पर हुई थी गोलीबारीअरुणाचल प्रदेश के तुलुंग ला इलाके में तब असम रायफल्स के चार जवान चीनी सैनिकों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। उस वक्त चीनी सैनिकों ने एलएसी पार की और गश्त कर रहे 20 अक्तूबर 1975 को भारतीय जवानों पर हमला किया। चीन ने तब भारत पर एलएसी पार करने के बाद आत्मरक्षा में गोली चलाने का बहाना बनाया था। 

Sources:-Hindustan

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