माता के इस मंदिर में मुस्लिम भी झुकाते हैं अपना सिर, अमेरिका, इंग्लैंड से भी आते हैं भक्त

आस्था

पटना : अरब सागर से छूकर निकलता 150 किमी तक फैला रेगिस्तान। बगल में 1000 फीट ऊंचे रेतीले पहाड़ों से गुजरती नदी। बाईं ओर दुनिया का सबसे विशालमय ज्वालामुखी। जंगलों के बीच दूर तक परसा सन्नाटा और इस सन्नाटे के बीच से आती आवाज ‘जय माता दी’।

दुनिया के 51 शक्तिपीठों में से एक हिंगलाज मंदिर में नवरात्रि का जश्न करीब-करीब भारत जैसा ही होता है। कई बार इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि ये मंदिर पाक में है या भारत में। हिंगलाज मंदिर जिस एरिया में है वो पाकिस्तान के सबसे बड़े हिंदू बाहुल्य इलाकों में से एक है। पूरे नवरात्रि यहां 3 किमी एरिया में मेला लगता है। दर्शन के लिए आने वाली महिलाएं गरबा डांस करती हैं। पूजा-हवन होता है। कन्या खिलाई जाती है। मां के गानों की गूंज दूर-दूर पहुंचती है। कुल मिलाकर हर वो आस्था देखने को मिलती है जो भारत में नवरात्रि पूजा के दौरान होती है।

हिंगलाज मंदिर आने वाले भक्तों की संख्या का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नवरात्रि के 9 दिनों में यहां के लोग अपने साल भर के खर्चे के बराबर कमा लेते हैं। मंदिर के प्रमुख पुजारी महाराज गोपाल गिरी का कहना है कि नवरात्रि के दौरान भी मंदिर में हिंदू-मुस्लिम का कोई फर्क नहीं दिखता है।

कई बार पुजारी-सेवक मुस्लिम टोपी पहने दिखते हैं। तो वहीं मुस्लिम भाई देवी माता की पूजा के दौरान साथ खड़े मिलते हैं। इनमें से अधिकतर बलूचिस्तान-सिंध के होते हैं। हर साल पड़ने वाले 2 नवरात्रों में यहां सबसे ज्यादा भीड़ होती है। करीब 10 से 25 हजार भक्त डेली माता के दर्शन करने हिंगलाज आते हैं। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, बांग्लादेश और पाकिस्तान के आस-पास के देश प्रमुख हैं।

चूंकि, हिंगलाज मंदिर को मुस्लिम ‘नानी बीबी की हज’ या पीरगाह के तौर पर मानते हैं, इसलिए पीरगाह पर अफगानिस्तान, इजिप्ट और ईरान जैसे देशों के लोग भी आते हैं। बता दें, 2006 में बीजेपी नेता और पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह पाक के तात्कालिक प्रेसिडेंट परवेज मुशर्रफ से स्पेशल परमिशन लेकर हिंगलाज माता के दर्शन करने गए थे।

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