इस चमत्कारी मंदिर में माँ काली दीवार पर लिखकर बताती हैं भक्तों की समस्या और उसका समाधान

आस्था

पटना: उत्तराखंड को ऐसे ही नहीं देवभूमि के नाम से जाना जाता है। इसे चमत्कारों की धरती भी कहा जाता है। इस जगह पर सबसे ज़्यादा देवी-देवताओं का निवास स्थान है। इसके साथ ही यहाँ समय-समय पर चमत्कार होते रहते हैं। उत्तराखंड के हर मंदिर में कोई ना कोई चमत्कार देखने को मिल ही जाता है। यहाँ के मंदिरों में एक अजब से शक्ति प्रवाहित होती है, ऐसा लगता है जैसे साक्षात देवी-देवता ही इन मंदिरों में निवास करते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही माँ काली के शक्तिपीठ के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अलौकिक चमत्कारों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।

कभी नहीं लौटता यहाँ से ख़ाली हाथ:

ऐसा कहा जाता है कि यहाँ देवी माँ ख़ुद आती हैं और अपने भक्तों की समस्याएँ सुनती हैं। अगर आप माँ काली के इस मंदिर में होने ववाले चमत्कारों को अपनी आँखों से देखेंगे तो आपको अपनी आँखों पर यक़ीन नहीं होगा। कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति माँ के इस दरबार में सच्चे मन से मनोकामना लेकर जाता है, वह कभी ख़ाली हाथ नहीं लौटता है। यहाँ माँ काली ख़ुद व्यक्ति की मनोकामना बताती हैं। इसके साथ ही तुरंत मनोकामना का समाधान भी कर देती हैं।

समस्या दीवार पर लिखकर बता देती हैं माँ कालिंका:

आपकी जानकारी के लिए बता दें हम जिस चमत्कारी मंदिर की बात कर रहे हैं, वह टिहरी के बटखेम गाँव में स्थित है। माँ कालिंका के नाम से मशहूर यह मंदिर अपने चमत्कारों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। अपने मन की मुराद लेकर यहाँ दुनिया के कोने-कोने से लोग आते हैं। यहाँ मंदिर में महाकाली की डोली भक्तों की मनोकामना को दीवार पर लिखती है। इसके तुरंत बाद ही माँ भक्तों की समस्या का समाधान दीवार पर लिखकर बता देती हैं। अब इसे चमत्कार नहीं तो और क्या कहा जाएगा। कहा जाता है कि देवी का पश्वा अपने हाथों पर सूखे चावलों को भिगोता है और तुरंत हरियाली में बदल देता है।

माँ कालिंका ख़ुद बुलाती हैं भक्तों को अपने पास:

यहाँ माँ काली साक्षात अपने भक्तों की पुकार सुनती हैं। इस मंदिर के बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि जो भी दम्पति माँ के इस दरबार में आता है, उसे संतान सुख की प्राप्ति भी होती है। इसी वजह से निसंतान दम्पति माँ के दर्शन-पूजन के लिए यहाँ पर भारी संख्या में आते हैं। नई टिहरी बटखेम गाँव पाँच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस गाँव में कुल 57 परिवार ही रहते हैं। इसी गाँव में मा कालिंका का भव्य मंदिर स्थापित है। इस मंदिर में प्रत्येक रविवार को एक ख़ास पूजा-अर्चना की जाती है। यहाँ माता की डोली का आह्वान किया जाता है। इसके बाद माँ कालिंका ख़ुद भक्त को अपने पास बुलाती हैं और उसकी समस्या का समाधान करती हैं।

मंदिर की घटनाओं को आजतक नहीं सुलझा पाया विज्ञान:

इस मंदिर में केवल उत्तराखंड के ही नहीं बल्कि दुनिया के कोने-कोने से लोग अपनी समस्याओं का समाधान पाने के लिए आते हैं। इस मंदिर में दिल्ली, मुंबई, राजस्थान और देश के अन्य जगहों से लोग आते हैं और माता की कृपा पाते हैं। माँ यहाँ आने वाले अपने हर भक्त की मनोकामना पूर्ण कर देती हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि माँ कालिंका के इस मंदिर में होने वाली घटनाओं को आजतक विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया है। यहाँ होने वाले चमत्कारों को देखकर कई वैज्ञानिकों के दिमाग़ हिले हुए हैं। माता का आशीर्वाद लेने वालों में कई वैज्ञानिक भी शामिल हैं।

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