बिहार में बसता है मिनी शिमला, मोह लेगा आपका मन

कही-सुनी

पटना: काम से बोझिल हो जाने के बाद साल में एक बार हर किसी का बाहर घूमने का मन करता है। जहां पर शांत माहौल हो, किसी भी तरह की रोकटोक ना हो जो मन चाहे आप वो कर सकें। अगर आप बिहार के निवासी है और अपने प्रदेश से बाहर ना जाकर वहीं पर शिमला का मजा लेना चाहते हैं तो एक बार सिमुलतला आकर देखिए। यहां पर आने के बाद आपको ऐसा लगेगा कि आप शमिला में घूम रहे हैं। आसमान को छूती पहाड़िया, नहर और दूर तक दिखने वाली नदियां आपका मन मोह लेंगी।

मन को मिलेगी शांति

सिमुलतला वो जगह है जहां पर आने के बाद लोगों के मन को शांति मिलती है। घने जंगलों के बीच घूमना एक आनंद का एहसास दिलाता हैं। खामोशी की आवाज़, विशाल आकाश में बिखरे हुए अनगिनत चमकते सितारे और वहां की प्राचीन अवस्था किसी को भी अतीत में ले जाती है। यहां हल्दिया झारना, लट्टू पहाड और राजा कोठी पर्यटकों का मन मोह लेती हैं।

मेहमाननवाजी जीत लेगी दोस्त

भीड़भाड़, सील पैक पानी और डिब्बा बंद खाने वाले लोग अगर लजीज देशी खाने का आनंद लेना चाहते हैं तो ये जगह आपको खूब भाने वाली है, क्योंकि यहां पर अब भी मेहमानों को सील पैक पानी नहीं बल्कि कुएं का पानी पिलाया जाता है। खाने में बिहार के कई सारे व्यंजन का मजा ले सकते हैं। विशाल पुरानी निर्जन इमारतों की बनावट शैली देखते ही बनती है।

सिमुलतला का सुनहरा अतीत बहुत ही गौरवशाली रहा है और आज भी इसकी गवाही दे रही है वो सैकड़ों प्राचीन इमारतें। ये इमारतें आपको बिहार के इतिहास से रूबरू कराएंगी।

ब्रिटिश काल से है ताल्लुकात

इस स्थान का अस्तित्व अंग्रेजों के जमाने से है। बताया जाता है कि सिमुलतला एक दैवीय हेल्थ रिसोर्ट हुआ करता था जिसकी बंगाली समुदाय में एक विशेष महत्व हुआ करता था।

बंगाल के लोग यहां की मिट्टी, पानी और वायु को पवित्र मानते हैं और मानते हैं कि इसमें चमत्कारिक उपचार शक्ति है। यह उनके सभी बीमारियों और स्वास्थ्य को ठीक कर सकता है। बंगाली भाषा और संस्कृति का प्रभाव यहाँ के लोगों की बोलियों और सड़कों के साइन बोर्डों में देखा जा सकता है।

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