” IIT की परीक्षा और बिहार “ आप भी जरूर पढ़े……

बिहारी जुनून

पंकज भाई अच्छा लिखते है  इसे भी पढिये ।

अभी IIT-JEE (adv) में प्रदेशों का प्रदर्शन देख रहा था। उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्य है। उत्तर प्रदेश के बाद राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलेंगाना और आंध्रप्रदेश का स्थान है। बिहार कहीं नही है… पहले दस स्थान में होने की संभावना भी क्षीण है।

फिर बिहार है कहाँ ??
बैंगलोर के अधिकांश प्राइवेट कॉलेज में कम से कम पच्चीस प्रतिशत बिहारी हैं…
पश्चिम बंगाल के हर कॉलेज में औसतन बीस से पच्चीस प्रतिशत बिहारी हैं…
कुछ साल पहले तक महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कॉलेजों में औसतन दस प्रतिशत बिहारी…
लवली प्रॉफेसनल यूनिवर्सिटी… एमिटी यूनिवर्सिटी… सत्यभामा यूनिवर्सिटी…VIT… MIT… AIT… BIT… CIT… DIT… EIT… FIT… GIT … सब जगह किसी और प्रदेश से कोई मिले न मिले लेकिन बिहारी जरूर मिल जाएँगे।

हर कोचिंग इंस्टिट्यूट में बिहार के शिक्षक बड़ी सँख्या में हैं। बिहार से बाहर का रुख करना बेकार है… बिहार के अंदर ही बेहतरीन शिक्षक भरे पड़े हैं। IIT प्रवेश परीक्षा के लिए फिजिक्स की सबसे लोकप्रिय किताब “कांसेप्ट ऑफ फिजिक्स” और गणित की सबसे लोकप्रिय किताब “प्रॉब्लम प्लस इन IIT मैथमेटिक्स” बिहारी शिक्षकों ने लिखे हैं।

IIT-JEE के लिए प्रसिद्व शहरों में कोटा, दिल्ली, हैदराबद प्रमुख हैं। इन सभी शहरों को देख चुका हूँ … लेकिन पटना के बोरिंग रोड/महेंद्रू/मुसल्लह पुर हाट वाली रौनक मुझे कहीं नही दिखी… कोटा में भी नही। हज़ारों की सँख्या में टीचर्स… लाखों छात्र… अनगिनत लॉज… ढाबा… मेस… छात्रों पर आधारित पूरी अर्थव्यवस्था। बेहतरीन शिक्षक और सबसे ज्यादा मेहनती और महत्वकांक्षी छात्र… रिजल्ट फिर भी काम चलाऊ !!

आनंद कुमार अपने सुपर 30 में खासे कामियाब हुए हैं… अभयानंद सर सुपर 30 के तर्ज पर देश के अलग अलग हिस्से में केंद्र स्थापित कर कामयाब भी हुए हैं और लोकप्रिय भी।

दिक्कत क्या है ?
ऐसा नही है कि बिहार में सुपर 30 के तीस छात्र ही मेधावी हैं। लाखों छात्र हैं … कोटा में, पटना में, दिल्ली में और बिहार के अलग अलग हिस्से में… इनमें से हज़ारों में गजब की प्रतिभा है।
ऐसा भी नही है कि बिहार के सारे छात्र गरीब हैं। पटना का कोचिंग हाउस फूल चलता है। दिल्ली और कोटा बिहारियों के वजह से गुलज़ार है।
ऐसा भी नही है कि बिहारी शिक्षक पढ़ाते नही हैं … साढ़े तीन साल तक फिजिक्स पढ़ाते चले जाते हैं।

दिक्कत क्या है ?
“पढ़ा दिया… मेरा काम खत्म हो गया।” ये सबसे बड़ी दिक्कत है। बेहतर रिजल्ट के लिए अकाउंटिबिलिटी, रिस्पांसिबिलिटी, कंसर्न और कमिटमेंट बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसपर बिहार में काम होना बाकी है। आंध्रप्रदेश और तेलेंगाना इसी कारण से बेहतर रिजल्ट देते हैं… इन दो प्रदेशों में इंस्टिट्यूट छात्रों की पूरी जिम्मेदारी अपने पास रखते हैं और पूर्ण समर्पण से छात्र और अध्यापक दोनों मेहनत करते हैं। सुपर 30 में भी ऐसा होता है… इसलिए वहाँ से रिजल्ट मिलता है।

“दूर के ढोल सुहावने” बिहार के शिक्षक बिहार जाकर कोटा/दिल्ली की सुविधा उपलब्ध करवाए तब भी… उनकी कीमत उतनी नही होगी। कई मित्र हैं जिनकी अलग अलग संघर्ष कथाएँ हैं… कोचिंग चलाना भी महँगा काम है… सुपर 30 चल पाने के रामानुजम स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स में हज़ारों छात्रों को फीस चुका कर पढ़ना होता है।

एक एक बैच में 500-1200 छात्र नही पढ़ना चाहिए। ये बड़ी दिक्कत है।
टेस्टिंग/परफॉर्मेस एवोल्यूशन/एनालिसिस/कांसेप्ट वाइज ट्रैकिंग/स्ट्रेस मैनेजमेंट/ऑप्टिमाइजेशन/एप्टीट्यूड बिल्डिंग … आदि कई चीजें हैं जिसपर आधुनिक कोचिंग सिस्टम को काम करते रहना चाहिए।

अंत में…

शिक्षक का काम केवल पढ़ाना नही होता… अभिवावक का काम बस पढ़ने के लिए पैसा देना नही होता… हर बात का समाधान बस कान मरोड़ना नही होता… किसी भी कठिन प्रवेश परीक्षा में छात्र, शिक्षक और अभिभावक को टीम की तरह काम करना चाहिए और पठन-पाठन के अतिरिक्त मनोवैज्ञानिक चुनौतियों से दो-चार होने को तैयार रहना चाहिए।

किसी भी छात्र के सफलता में 5 प्रतिशत योगदान शिक्षकों का… 5 प्रतिशत अभिवावक का और बाकी का 90 प्रतिशत खुद छात्र का होता है। जो शिक्षक ने अपना काम ( केवल पढ़ाना उनका काम नही होता) ठीक से नही किया तो छात्र का 45 प्रतिशत निष्फल हो जाता है और जो अभिवावक ने अपना 5 प्रतिशत योगदान ( उनका योगदान बस व्यवस्था कर देना भर नही होता ) ठीक से नही दिया तो छात्र का बाकी 45 प्रतिशत निष्फल हो जाता है।

लिखा इसलिए कि चाहता हूँ बिहार से भी बेहतर परिणाम आए… जो बिल्कुल भी मुश्किल नही। कोशिशें थोड़ी और बेहतर होनी चाहिए। अपनी भावनाओं को आहत होने से बचाइए।

बाकी सब कुशल मंगल है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *