अफसर ने अपनी बेटी का एडमिशन कराया सरकारी स्कूल में, कहा- मैं भी सरकारी स्कूल में पढ़ बना अफसर

सच्चा हिंदुस्तानी

आमतौर पर अधिकारी अपने बच्चों को सरकारी नहीं बल्कि प्राईवेट स्कूल में पढ़ाने की सोचते हैं ताकि बच्चों को हाई एजुकेशन मिल सके। लेकिन छत्तीसगढ़ में एक कलेक्टर ने सरकारी स्कूल का स्तर सुधारने के लिए एक अनूठी पहल की है।

सरकारी स्कूल का ढीला रवैया देखकर आजकल कोई भी मां-बाप अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाना नहीं चाहते हैं लेकिन छत्तीसगढ़ के बलरामपुर के इस कलेक्टर ने अपनी बेटी का एडमिशन शासकीय प्राथमिक शाला में कराकर एक अनूठी मिसाल कायम की है।

कलेक्टर अवनीश शरण का ये प्रयास शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाना है। उनका कहना है कि हमारे एक कदम से ही देश बदलेगा। किसी ना किसी को आगे बढ़ने के लिए कदम उठाना पड़ेगा। उनका कहना है कि इस प्रयास से निश्चित तौर पर जिले के अन्य अधिकारी भी प्रेरणा लेंगे। जिससे आने वाले समय में सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता खुद ब खुद सुधर जाएगी।

अवनीश का कहना है कि लोगों के मन में शासकीय स्कूल को लेकर जो मंशा है उसे बदलने में ये कारगर साबित होगा। इसलिए मैंने अपनी 6 साल की बेटी वेदिका का एडमिशन जिला मुख्यालय की शासकीय प्रज्ञा प्राथमिक शाला में कराया है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि कलेक्टर खुद स्कूल आकर आम परिजन की तरह अपनी बेटी का एडमिशन कराया। एडमिशन के बाद थोड़ी देर के लिए खुद क्लास में बैठकर बच्चों के साथ पढ़ाई देखी। कलेक्टर के इस पहल की आज जिले भर में सराहना की जा रही है। कलेक्टर के इस पहल से अब निश्चित तौर पर सरकारी स्कूल की शिक्षा गुणवत्ता सुधर सकेगी। अब जरूरी है तो बस प्राइवेट व बड़े स्कूलो के भ्रम को तोड़ने की।

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