नई सरकार का बड़ा बदलाव, हो सकते हैं IAS-IPS के तबादले

राजनीति

राज्य में बड़े प्रशासनिक फेरबदल के आसार हैं। नई सरकार के गठन के बाद इसकी संभावना काफी बढ़ गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही बड़ी संख्या में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादले हो सकते हैं। फील्ड में तैनात ऊपर से नीचे तक के कई अधिकारी के बदले जाने को लेकर कयासों का दौर तेज हो गया है। वरीय पदों पर भी फेरबदल के आसार नजर आ रहे हैं।

सरकार के विभागों में वरीय पदों पर कार्यरत अफसरों का भी तबादला हो सकता है। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि आनेवाले कुछ दिनों में प्रधान सचिव और सचिव स्तर के कई अधिकारी इधर से उधर किए जा सकते हैं। इसमें कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे अफसर भी शामिल हो सकते हैं।

फील्ड में तैनात आईएएस और आईपीएस अफसरों के भी जल्द तबादले के आसार हैं। कई जिलों के डीएम और एसएसपी या एसपी भी बदले जा सकते हैं। वहीं जोनल आईजी, रेंज डीआईजी के पद पर भी फेरबदल संभव है। लम्बे समय से एक ही जिले में पदस्थापित आईएएस और आईपीएस अफसरों का हटना तय मना जा रहा है। वहीं अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) भी बड़ी संख्या में बदले जा सकते हैं।

नई सरकार के सामने दो बड़ी चुनौतियां
भाजपा के समर्थन से नई सरकार के गठन को पटना हाईकोर्ट में दो अलग-अलग अर्जी दायर कर चुनौती दी गई है। एक अर्जी पूर्व मंत्री के समर्थक जितेंद्र कुमार की ओर से अधिवक्ता दिनेश कुमार ने दायर की है। वहीं, दूसरा केस राजद के दो विधायक सरोज यादव तथा चंदन कुमार की ओर से अधिवक्ता जगरनाथ सिंह, शिवनंदन भारती और मुकेश कुमार यादव ने दायर की।
शाम चार बजे विधायक की ओर से दायर अर्जी पर जल्द सुनवाई करने की गुहार मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन तथा न्यायमूर्ति डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ से लगाई गई। कोर्ट ने उनके अनुरोध को नामंजूर करते हुए कहा कि किसी भी केस पर जल्द सुनवाई करने के लिए सुबह साढ़े 10 बजे अनुरोध किया जाता है न कि शाम चार बजे।
ऐसे भी इस केस पर जल्द सुनवाई करने की गुंजाइश नहीं है। इस केस पर जल्द सुनवाई करने के अलावा और भी कई काम कोर्ट के पास है, जो इससे ज्यादा महत्वपूर्ण है। जितेंद्र कुमार की अर्जी में कहा गया है कि महामहिम को सदन की सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने कानूनी प्रावधानों का पालन किए बिना नीतीश कुमार को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया।
मुख्यमंत्री के रूप में ली गई शपथ कानूनी रूप से गैर संवैधानिक है। महामहिम ने सदन के एकमात्र सबसे बड़ी पार्टी को नजरअंदाज कर सरकार बनाने का न्यौता दिया। अर्जी में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 163, 164 सहित 174 का अनुपालन नहीं किया गया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया गया। दूसरे केस में कहा गया कि गुरुवार सुबह 10 बजे हुए शपथ ग्रहण को निरस्त किया जाए, क्योंकि एसआर बोम्बई तथा रामेश्वर प्रसाद केस में दिए गए फैसले का पालन नहीं किया गया है।
मौजूदा समय में राष्ट्रीय जनता दल सदन की सबसे बड़ी पार्टी है। पार्टी को कांग्रेस सहित कई अन्य विधायकों का समर्थन है। पार्टी के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव की ओर से महामहिम को दिए गए पत्र पर कोई विचार नहीं किया गया और नीतीश कुमार को सरकार बनाने को आमंत्रित कर दिया गया। पहले शपथ ग्रहण कार्यक्रम गुरुवार को शाम पांच बजे निर्धारित किया गया था, लेकिन कार्यक्रम के समय को बदलकर 10 बजे कर दिया गया।

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