IAS aniruddh kumar

IAS Aniruddh Kumar

आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) अधिकारी की चर्चा आते ही किसी भी सामान्य व्यक्ति के जेहन में आंख पर चश्मा चढ़ाये, फाइलों के बीच दबे एक रोबदार अधिकारी की तस्वीर उभरती है।

पर आप यकीन करेंगे कि एक्टिंग भी किसी आईएएस अधिकारी का दूसरा प्यार हो सकता है ?

ऐसे ही एक आईएएस अधिकारी हैं अनिरुद्ध कुमार. फिलहाल बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग में अपर सचिव के पद पर तैनात अनिरुद्ध कुमार मंचीय अदाकार होने के साथ ही लोक गायक व भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता भी हैं.

वर्ष 2012 में बनी एक भोजपुरी फिल्म में उन्होंने प्रमुख किरदार निभाया था. पेश है उनसे सुमित कुमार की हुई बातचीत के प्रमुख अंश.

जहानाबाद के मूल निवासी अनिरुद्ध कुमार का महज आठ साल की उम्र में ही कला से जुड़ाव हो गया. शुरुआती दिनों में वे गांव और स्कूल के रंगमंच पर अभिनय पेश किया करते थे.

अपने बेहतर अभिनय को लेकर कई बार पुरस्कृत भी हुए. उनको कैरेक्टर आर्टिस्ट से लेकर कॉमेडियन का रोल अधिक पसंद है. वे सार्वजनिक मंच पर लोकगीतों की मधुर तान भी छेड़ते हैं.

लंबे समय से सरकारी सेवा में रहने के बावजूद उन्होंने अपने कला प्रेम को अब तक जिंदा रखा है.

सेवा में रहते हुए भी हर साल दीवाली पर गांव में होने वाले सांस्कृतिक नाट्य आयोजन में हिस्सा लेना नहीं भूलते.

अपने नाटकों के माध्यम वे सरकारी द्वारा चलायी जा रही प्रमुख योजनाओं के बारे में भी आम लोगों को बताते हैं.

संघर्षमय रहा पूरा जीवन

अनिरुद्ध कुमार का पूरा जीवन संघर्षमय रहा. उनका जन्म जहानाबाद के रतनी फरीदपुर (उस वक्त कुर्था) प्रखंड के धानाडीरा गांव में हुआ था. उनकी प्राइमरी व मिडिल शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल में हुई.

आठवीं से आगे की पढ़ाई के लिए उनका नामांकन पांच किमी दूर शरता हाईस्कूल में कराया गया. स्कूल आने-जाने के लिए उनको हर दिन पैदल दस किमी चलना पड़ता था.

बचपन से ही मेधावी होने की वजह से हमेशा क्लास में उनकी दूसरी या तीसरी पोजिशन होती थी. दसवीं में किसी कारण से उनको थर्ड डिवीजन मिला था, लेकिन 11वीं में उनको प्रथम रैंक हासिल हुई.

उस स्कूल से फॉर्म भरने वाले 60 में से मात्र छह स्टूडेंट पास किये थे, जिसमें मात्र उनको ही प्रथम श्रेणी हासिल हुई थी. बाकी दो ने सेकेंड डिवीजन जबकि तीन ने थर्ड डिवीजन मिला.

उनकी इंटर की पढ़ाई पटना कॉलेज में पूरी हुई. इसी कॉलेज से उन्होंने पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन और एमए भी पूरा किया.

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2012 में मिला भोजपुरी फिल्म में पहला ब्रेक

अनिरुद्ध कुमार को 1982 की बीपीएससी की पहली परीक्षा में रजिस्ट्रार का पद मिला, बावजूद उन्होंने दूसरी बार परीक्षा दी और 1983 बैच में डिप्टी कलेक्टर चुन लिये गये.

जनवरी 2016 में उनको आइएएस में प्रोमोट किया गया. अनिरुद्ध कुमार को वर्ष 2012 के दिसंबर माह में पहली बार एक भोजपुरी फिल्म मुंबइया लड़की, देशी बबुआ से फिल्मों में ब्रेक मिला.

इस साल ही उनकी मुलाकात सीवान के मूल निवासी भोजपुरी फिल्म निर्देशक अभिषेक भानू से हुई. पटना में हुई फिल्म की चर्चा के बाद उनको ऑडिशन के लिए मुंबई बुलाया गया.

इस दौरान निर्देशक को उनकी अभिनय शैली व संवाद पसंद आया और वे सेलेक्ट कर लिये गये. फिल्म में उनको लड़के के पिता व एक मुखिया का किरदार सौंपा गया.

यह मुखिया पंचायत में तो शेर बना रहता है, लेकिन पत्नी के सामने भीगी बिल्ली बना रहता है. फिल्म की शूटिंग तो वैसे सात महीने चली, लेकिन काम की व्यस्तता को देखते हुए उनके पार्ट की शूटिंग सात दिन में पूरी कर ली गयी.

हालांकि डबिंग के लिए फिर उनको कुछ दिनों के लिए जाना पड़ा.इस फिल्म में अनिरुद्ध कुमार के अभिनय की कई लोगों ने प्रशंसा की.

इनको अगली फिल्म में अभिनय के लिए भी बुलावा आया, लेकिन सरकारी कार्यों की वजह से दोबारा समय नहीं निकाल सके.

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रिटायरमेंट के बाद फिर फिल्मी दुनिया में लौटूंगा

इनके साथ अभिनय किये कई कलाकार फिलहाल कई फिल्मों व सीरियल में अभिनय कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि मई 2020 में रिटायरमेंट के बाद वे पूरी तरह से फिल्मी दुनिया में लौट जायेंगे.

उस वक्त तक उनकी सारी जिम्मेदारियां भी खत्म हो चुकी होंगी.

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पत्नी व बच्चों का मिला भरपूर साथ

अनिरुद्ध कुमार ने बताया कि एक्टिंग का अपना शौक पूरा करने में उनको अपनी पत्नी मधु रानी कुमारी से काफी मदद मिली.

उनकी पत्नी ने न सिर्फ प्रोत्साहित किया, बल्कि पल-पल उनका हौसला बढ़ाते हुए शौक पूरा करने में मदद भी की. सफल गृहिणी की भूमिका निभाते हुए पत्नी ने चारों बच्चों (दो बेटा-दो बेटी) को बेहतर इंजीनियर व डॉक्टर बनाया.

सभी बच्चे अलग-अलग क्षेत्र में सेटल हैं. श्री कुमार खुद पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं. उनके ऊपर के सभी भाई-बहन रिटायर कर चुके हैं.

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सरकार के लिए हमेशा रहे संकटमोचक

अनिरुद्ध कुमार राज्य सरकार के लिए हमेशा संकट मोचक रहे. आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उनके व्यापक अनुभव को देखते हुए ही उनको पिछले चार साल से अधिक समय से आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव, संयुक्त सचिव व अपर सचिव के पदों पर रखा गया है.

वर्ष 2008 की कोसी आपदा के वक्त भी उनको तत्कालीन आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव आरके सिंह (वर्तमान में केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री) के साथ स्पेशल एडीएम (आपदा) बना कर सुपौल भेजा गया था.

करीब तीन महीने तक रहने के दौरान उन्होंने सुचारू रूप से राहत कैंप चलाने में प्रमुख भूमिका निभायी थी. अनिरुद्ध कुमार की मानें, तो कोसी बाढ़ के बाद इस वर्ष आयी बाढ़ सबसे गंभीर आपदा है.

वैसे तो बाढ़ से डेढ़ दर्जन जिले प्रभावित हुए, लेकिन उनमें से आठ जिलों में बहुत अधिक क्षति हुई है. उन्होंने माना कि हर साल की अपेक्षा इस बार बाढ़ राहत में केंद्र सरकार से भरपूर मदद मिली.

दशहरा बाद केंद्रीय टीम के क्षति आकलन के बाद और अधिक मदद राशि मिलने की उम्मीद है.

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जहां भी रहे, लोगों ने याद रखा

करीब 32 साल के लंबे प्रशासनिक कैरियर के दौरान अनिरुद्ध कुमार जहां भी रहे, लंबे समय तक याद किये गये. उनकी सबसे पहली पोस्टिंग वर्ष 1985 में तत्कालीन पूर्णिया जिले के भरगामा में अंचलाधिकारी के पद पर हुई.

यहां पर करीब साढ़े चार साल रहने के बाद उनको रानीगंज (अररिया) का अंचलाधिकारी और फिर चेनारी (रोहतास) का अंचलाधिकारी बनाया गया.

वर्ष 1998 में उनको बिक्रमगंज का डीसीएलआर बनाया गया. वर्ष 2003 में वे सासाराम के डीसीएलआर बनाये गये. जनवरी 2006 में

उनकी पोस्टिंग एसडीओ झंझारपुर (मधुबनी) के पोस्ट पर की गयी. वर्ष 2008 में उनको पटना जिले में एडीएम (आपदा) बनाया गया.

इसके बाद करीब पांच वर्षों तक वे पटना में एडीएम राशनिंग, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर, एडीएम सामान्य व डीडीसी के पदों पर रहे. 19 मई से 2013 से आपदा प्रबंधन विभाग में कार्यरत हैं.

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