पटना का दरभंगा हाउस: पटना दरभंगा हाउस राज काल के धरोहरों में से एक है जिसका पुराना नाम बांकीपुर पैलेस है |

कही-सुनी

पटना दरभंगा हाउस राज काल के धरोहरों में से एक है जिसका पुराना नाम बांकीपुर पैलेस है | गंगा किनारे स्थित यह पैलेस दरभंगा राज को सत्ता मिलने से लेकर इसे गंवाने तक का इतिहास संजोये हुए है | आइये दरभंगा हाउस कि ख़ास विशेषताएं पर एक नज़र डालते हैं |

राजसत्ता प्राप्ति की गवाह
तिरहुत सरकार दरभंगा महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह को जब तिरहुत की बागडोर सौपी गयी तो वे तिरहुत में ही पदभार ग्रहण करना चाहते थे | लेकिन उस समय ऐसी स्थित उत्पन्न हो गयी कि उन्हें पटना में पदभार ग्रहण करने के लिए बुलाया गया |

इसके लिए पटना के बांकीपुर में पटना मेडिकल कालेज से पश्चिम में खाली पड़ी मैदान खरीदी गयी जिसमे तिरहुत सरकार को राज्यसत्ता सौंपने का कार्यक्रम रखा गया |इस कार्यक्रम में यह भी घोषणा की गयी कि इस मैदान में एक भव्य महल बनेगा |

भव्य महल और बागीचे
इस खुले मैदान पर एक भव्य महल बनकर तैयार हो गया | साथ ही महल के सटे एक गार्डेन का भी निर्माण हुआ |

इस भव्य महल का निर्माण बहुत ही कलात्मक ढंग से बनाया गया है जिसे देखने से स्पस्ट होता है कि तिरहुत सरकार लक्ष्मेश्वर सिंह को कला एवं प्रकृति से भी बहुत लगाव था |

गंगा के घाट पर देवी काली का अद्भुत मन्दिर
अंग्रेजी हुकूमत ने वास्तुकार डा० एम०ए० कोरनी को इस महल की निर्माण का जिम्मा सौपा था | उसने मिथिला कि परम्परा के अनुसार इस महल को दो भांगों में बांटा एक महाराजा ब्लाक और दुसरा महारानी ब्लाक |

दोनों ब्लाक के बीच में महाराजा परिवार की कूल देवी काली का एक भव्य मन्दिर का निर्माण किया गया |

राज स्त्रियों के स्नान के लिए थी सुरंगनुमा सीढ़ी
इस महल की एक ख़ास विशेषता यह था कि राज परिवार कि महिलायें एक सुरंगनुमा सीढ़ी के सहारे गंगा स्नान को जाती थी और उसी रास्ते से वापस महल में वापस आ जाती थी | अब इस सुरंगनुमा सीढ़ी को हमेशा के लिए बंद करा दिया गया है|

तिरहुत सरकार लक्ष्मेश्वर सिंह की मृत्यु के बाद महाराज रामेश्वर सिंह उस महल में रहने लगे | बाद में अंग्रेजी हुकूमत ने अपनी नीति में परिवर्तन कर उस महल का नाम दरभंगा हाउस कर दिया |

पटना मेडिकल कालेज की स्थापना में योगदान
जब बांकीपुर पैलेस दरभंगा हाउस के नाम से प्रसिद्ध हुआ तो पटना मेडिकल स्कुल की जगह पटना मेडिकल कालेज की स्थापना कि मांग होने लगी जिसमे रामेश्वर सिंह ने पटना मेडिकल कालेज कि सथापना के लिए 4 लाख रूपये और 30 बीघा जमीन इस मेडिकल कालेज को दानस्वरूप भेंट किया | इससे यह स्पष्ट होता है दरभंगा महाराज लोगों के स्वास्थ्य के प्रति बहुत ही जागरूक थे | उनके दान के बाद महल का बगान एक अमर इतिहास बन गया |

जमींदारी बचाने के लिए अदालती लड़ाई की साक्षी
दरभंगा महाराज इस महल में बहुत कम ही रहे | लेकिन इस महल से उन्होंने बहुत ही अहम् फैसले लिए | बिहार राज्य निर्माण का अहम फैसला इसी महल में लिया गया | इतना ही नहीं पटना हाईकोर्ट की स्थापना का प्रस्ताव भी इसी महल से पास हुआ |

दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह ने 1940 से 1942 तक अपनी जमींदारी बचा

ने के लिए अदालती लड़ाई भी इसी महल से लड़ा था | दरभंगा हाउस उस गुप्त बैठक की मेजबानी का गबाह भी है जब महात्मा गांधी ने कांग्रेसियों को अंग्रेज अधिकारयों के साथ कोई भी मीटिंग नहीं करने एवं उसके साथ किसी भी भोज में शामिल नहीं होने का आह्वान किया था |

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