राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होंगे सीतामढ़ी के Dr गोपाल, गरीबों को शिक्षित करने में निभाई भूमिका

प्रेरणादायक

शिक्षक दिवस पर अब बिहार के छह नहीं बल्कि सिर्फ एक ही शिक्षक को राष्ट्रपति राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करेंगे। केंद्र सरकार ने चालू वर्ष से पुरानी व्यवस्था को समाप्त करते हुए प्रत्येक राज्य के सिर्फ एक शिक्षक के सम्मान की व्यवस्था लागू कर दी है। इस साल शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए सीतामढ़ी जिला के राजकीय मध्य विद्यालय उर्दू बनचौरी के शिक्षक डॉ। गोपाल जी को राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। इन्हें आगामी 5 सितंबर को राष्ट्रपति द्वारा दिल्ली में सम्मानित किया जाएगा। इस बार सूबे में एक मात्र सीतामढ़ी के शिक्षक को राष्ट्रीय सम्मान के लिए चयनित किया गया है।

गरीबों को शिक्षित करने में निभाई भूमिका :

जिले के परसौनी प्रखंड स्थित देमा गांव निवासी चतुर्भुज सहाय के पुत्र डॉ। गोपाल जी का जन्म 25 मई 1972 को हुआ। बचपन से ही शांत व परोपकारी प्रवृति के रहे डॉ। गोपाल ने 1986 में सीतामढ़ी उच्च विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा उतीर्ण की। 1988 में इंटरमीडिएट करने के बाद रायसन शास्त्र प्रतिष्ठा की डिग्री प्राप्त की। 1995 में एमएससी करने के बाद 1999 में बीएचयू से बीएड किया। वर्ष 2000 में मवि थुम्मा में सहायक शिक्षक के रूप में योगदान किया। प्रोन्नति मिलने के बाद वे 2012 में राजकीय मध्य विद्यालय बनचौरी में योगदान किया। यहां दलित वर्ग के बच्चों में शिक्षा का अभाव था। उन्होंने दलित बच्चों को शिक्षा के लिए जागरूक किया।

गांवों का भ्रमण कर बच्चों को स्कूल से जोड़ा लोगों को शिक्षा के महत्व से कराया अवगत

 

इन्होंने गांव का भ्रमण किया। फिर समुदाय को विद्यालय से जोड़कर छीजित बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिया। इनके इस कार्य को पूरे शिक्षा महकमा में सराहा गया। इस कार्य के लिए इन्हें राष्ट्रपति से सम्मानित करने के लिए चयनित किया गया है। इसकी सूचना पर पूरे परिवार ही नहीं जिले में खुशी की लहर है। सूबे के एकमात्र सीतामढ़ी के शिक्षक का चयन से जिलेवासी गौरवान्वित हो रहे है। बताते हैं कि सम्मान समारोह में पत्नी रश्मि रंजन भी साथ जाने के लिए उतावली हो रही हैं। दूसरी तरफ, गोपाल जी को सम्मान मिलने से जिले के शिक्षकों में खुशी का माहौल है। उन्होंने इसके लिए उन्हें बधाई भी दी है।

 

बताते चले कि-शिक्षा विभाग ने पूर्व की तरह इस वर्ष के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए जिलों से ऑनलाइन नाम आमंत्रित किए थे। प्राप्त आवेदनों में से छह के नाम का चयन करते हुए शिक्षा विभाग ने अपनी अनुशंसा मानव संसाधन विकास मंत्रलय को भेजी थी। जवाब में केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि बिहार समेत दूसरे राज्यों के सिर्फ एक शिक्षक को ही राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया जाए। पत्र में गोपाल के चयन की जानकारी भी दी गई है।

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