लक्ष्य प्राप्ति के लिए धुन के पक्के व्यक्ति के आगे प्रतिकूल परिस्थितियों भी बौना साबित होती है. यह बात खुशबू कुमारी ने बिहार लोक सेवा आयोग के परीक्षा में सफलता प्राप्त करके शत प्रतिशत सही कर दी है दो बच्चों की मां एवं सेवानिवृत्त सेना के जवान की पत्नी होने के बावजूद घर के सारे जिम्मेदारियों को निभाते हुए उसने इस परीक्षा में सफलता का जो झंडा गाड़ा

.वह न केवल अत्यंत पिछड़े गांव बेतौली मठ के लिए बल्कि इलाके लिए गर्व की बात है. इसे एक कीर्तिमान कहा जा सकता है बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 340वां रैंक लेकर श्रम एवं प्रवर्तन पदाधिकारी का पद भले ही प्राप्त किया हो लेकिन यह उनके परिस्थितियों को देखते हुए बहुत बड़ी सफलता कही जा सकती है.

पति के पेंशन से पढ़ाई का खर्च

इस सफलता में उनके सेना से रिटायर हुए पति ने भी इस परीक्षा की तैयारी में होने वाले खर्च का अपनी पेंशन से इंतजाम करते रहे. उन्होंने अपनी पत्नी की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि साल 2007 में शादी होने के बाद से उन्होंने अपनी पत्नी को इंटर की पढ़ाई के इलावा उच्च शिक्षा दिलाई और उन्हें हमेशा बेहतर करने को लेकर प्रेरित और सहयोग करते रहे.

वहीं, एक बच्ची और एक चार वर्षीय लड़के की मां खुशबू कुमारी की बड़ी बेटी और पांचवीं कक्षा की छात्रा खुशी ने भी अपनी मां की तैयारी के कारण अपने छोटे भाई की जमकर देखभाल की ताकि मां की पढ़ाई में कोई दिक्कत न हो.

बहरहाल, एक ओर जहां ज्यादातर महिलाएं शादी और बच्चे होने के बाद पारिवारिक उलझनों में फंस जाती है, वहीं खुशबू कुमारी ने एक मिसाल पेश की है कि पारिवारिक कार्यों का निर्वहन करते हुए भी मेहनत और लगन से बड़ी सफलता प्राप्त की जा सकती है.

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