होम गार्ड की नौकरी पाने लिए सुबह-शाम पसीना बहा रहे अधेड़

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जहानाबाद शहर स्थित एरोड्रम स्टेडियम में इन दिनों 40 पार के लोग नौकरी पाने के लिए खूब पसीना बहा रहे हैं। वे सुबह-शाम दौड़ का अभ्यास करते हैं। ऊंची कूद, लंबी कूद तथा गोला फेंक में भी अपना शारीरिक दम-खम दिखा रहे हैं। दरअसल होमगार्ड की बहाली शुरू होने वाली है। आवेदकों के बाल और दाढ़ी में से सफेदी साफ दिखती है। शरीर भी ढलान की ओर है। लेकिन, मामूली नौकरी की इतनी आंकाक्षा है कि वे पूरा जोर लगाए हुए हैं।

वर्ष 2011 के जून माह में होमगार्डों की बहाली के लिए विज्ञापन निकला। होमगार्ड बनने के लिए 12044 अभ्यर्थियों ने तब आवेदन भी दिया। जिले में होमगार्ड के 229 पदों पर बहाली होनी थी। लेकिन, 11 साल बाद बहाली के लिए शारीरिक जांच परीक्षा शुरू हो रही है। अभ्यर्थियों ने बताया कि सामान्य कोटि के आवेदकों की तब अधिकतम उम्र सीमा 35 वर्ष थी। अनुजा वर्ग के 40 वर्ष तक की उम्र के अभ्यर्थी आवेदन कर सकते थे। 2011 में 35 साल की उम्र का आवेदक आज 45 साल का हो चुका है।

बेटों और भतीजों के साथ आ रहे अभ्यास करने
उनमें से कई के बच्चे भी सेना व अर्द्धसैनिक बहाली के लिए दौड़ लगा रहे हैं। स्टेडियम में शुक्रवार की सुबह शारीरिक अभ्यास करने पहुंचे अभ्यर्थी राकेश कुमार ने झिझकते हुए बताया कि उनका 22 साल का बेटा दौड़ लगाने की प्रेरणा देता है। बेटे की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि तीन राउंड यानि करीब 1200 मीटर में वे थक जाते हैं तो बेटा ही उन्हें हिम्मत बंधाता है।

थोड़ी देर में शरीर दे जाता है जवाब


अभ्यास के दौरान ही एक अधेड़ आवेदक की मांसपेसियों में खिचाव आ गया और वह लंगड़ा कर चलने लगा। उन्होंने कहा कि नौकरी की आस समाप्त हो गई तो दिल्ली  की एक फैक्ट्री में कमाने चले गए। परीक्षा की तिथि घोषित होने पर वे वहीं अभ्यास शुरू किए। परसों ही घर आए हैं। दौड़ने के दौरान गड्ढे में पैर पड़ गया तो यह हाल हो गया। वहीं अभ्यर्थी रामप्रवेश प्रसाद ने कहा कि अब हमलोगों की दौड़ की उम्र है? थोड़ी देर में ही दम फूलने लगता है और शरीर जवाब दे जाता है।

छह मिनट में पूरी करनी है 1600 मीटर की दौड़
जिले में 15 जुलाई से दौड़ प्रतियोगिता शुरू हो रही है। 1600 मीटर की दौड़ अधिकतम छह मिनट में पूरी करनी है। दौड़ में सफल अभ्यर्थियों को ही हाई जंप और शॉटपूट में शामिल होने का मौका मिलेगा। इधर, उम्रदराज आवेदकों की मदद के लिए कुछ स्वैच्छिक सेवानिवृति लेने वाले मिलिट्री के जवानों ने टे्रेनिंग सेंटर भी खोल रखा है। वे उन्हें सांस पर नियंत्रण करने, दम साधने, ऊंची छलांग लगाने और गोला फेंकने का गुर सिखा रहे हैं।

 

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