इतिहास के पन्नों में बनता बदलता पटना , बिहार की राजधानी पटना के बारे में रोचक बातें

जानकारी

पटना, जो कि बिहार की राजधानी है, उसका नाम आते ही ज़ेहन में गंदी सड़कें, बेकार राजनीति और सार्वजनिक वाहनों में ठसे हुए लोगों की छवि, दिमाग में उभरने लगती है। पूरे भारत में बिहार की छवि को बेहद बेढंगे तरीके से पेश किया गया है। लेकिन क्‍या आपको मालूम है कि आर्यभट्ट हों या पणिनी, चाणक्‍य हों या कालीदास, सभी लोग पटना से ही थे, जिन्‍हे भारतीय इतिहास में ज्ञान के क्षेत्र में धुंरधर माना जाता है।

आपको इस शहर में आने के बाद धर्म और संस्‍कृति का मिला-जुला रूप देखने को मिलेगा। भारत की असल छाप देखनी है तो पटना की सैर करना आवश्‍यक है।

कुछ ऐतिहासिक तथ्य

पटना की स्थापना 490 ईसा पूर्व मगध के राजा ने की थी।
प्राचीन समय में पटना को पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था।
यह एक ऐसा ऐतिहासिक शहर है जो आज तक सम्‍पन्‍नता से आबाद है।
इस शहर के बारे में मेगास्‍थनीज ने अपनी किताब, इंडिका में लिखा था।
सिक्‍खों के 10वें व अंतिम गुरू, गुरूगोविंद सिंह का जन्‍म यहां हुआ था।
पटना में तख्‍त श्री हरमंदिर बना हुआ है जो एक पवित्र धर्मस्‍थल है।
हरयंका, नंदा, मौर्य, शुंगा, गुप्त, पाला साम्राज्यों का अभ‍िन्न भाग रहा है
यह शहर। मौर्य काल में पटना की जनसंख्या करीब 4 लाख थी।
चीनी दार्शनिक फा हियान ने इस शहर को ‘पा-लिन-फोऊ’ नाम दिया था।
माना जाता है कि पुटराका राजा ने इस शहर को अपनी पत्नी पटाली के लिये जादू से तब बनाया था, जब रानी ने पुत्र को जन्म दिया था।
इसी से इसका नाम पटाली + पुत्र = पाटलीपुत्र पड़ा।
मना जाता है कि ‘पाटली’ एक पेड़ की प्रजाति है, जो सिर्फ पटना में पायी जाती है। उसी पर इसका नाम पड़ा।



आइए अब जानते हैं पटना के बारे में कुछ और जानकारियां:


पटना का नामकरण

कहा जाता है कि पहले इसे पाटलिपुत्र ही कहा जाता था, फिर शेरशाहसूरी ने पटना पर शासन किया और यहां की देवी पाटनी के नाम पर इसका नाम पटना रख दिया।

ज्ञान का भंडार

कालीदास, चाणक्‍य, आर्यभट्ट, पणिनि और वत्‍स्‍यानन की जन्‍मभूमि व कर्मभूमि भी पटना ही रही।

देश के सर्वाधिक आईएएस

देश की सर्वोच्‍च आईएएस परीक्षा को उत्‍तीर्ण करने वाले लोगों में से भारी संख्‍या सिर्फ बिहार पटना से होती है। देश के कई आईएसस सिर्फ पटना के होते हैं।

आजादी में योगदान

भारत की आजादी में पटना का विशेष योगदान रहा, नील की खेती के लिए चम्‍पारण आन्‍दोलन और भारत छोड़ों आन्‍दोलन की शुरूआत पटना से ही हुई थी।

कम होती हैं भ्रूण हत्‍या

आपको जानकर आश्‍चर्य होगा कि पटना में देश के कई आधुनिक क्षेत्रों के मुकाबले कहीं कम लगभग न के बराबर भ्रूण हत्‍या होती है।

विदेशों तक पहुंचा लिट्टी-चोखा का स्‍वाद

पटना, बिहार के कुछ स्‍ट्रीट फूड स्‍टॉल के लिट्टी-चाेखा का स्‍वाद, विदेशों तक फैल गया है। विदेशी पर्यटकों को ये काफी भाता है।

चार नदियों वाला शहर

पटना से चार नदियां गुजरती हैं- गंगा, सोन, गंडक और पुनपुन नदी।



डा. राजेन्‍द्र प्रसाद की कर्मभूमि

पटना में स्थित सदाक़त आश्रम, हमारे देशरत्‍न डा. राजेन्‍द्र प्रसाद की कर्मभूमि है। अब इसे एक पर्यटन स्‍थल बना दिया गया है।

 

शनिवार को खिचड़ी भोज

पटना के स्‍थानीय घरों में अक्‍सर शनिवार के दिन हमेशा खिचड़ी बनाई जाती है। जिसके साथ अचार, पापड़, दही और घी भी खाया जाता है।

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