कर्नाटक में दोहराया जा सकता है बिहार का इतिहास!

राजनीति

पटना: विपक्ष कर्नाटक चुनाव के बाद जिस जमावड़े को मोदी के रथ को रोकने की तरह देख रहा था वही आज कांग्रेस के सामने नतमस्तक है। शपथग्रहण के बाद मुख्यमंत्री कुमारस्वामी का यह कहना कि वो जनता नहीं बल्कि कांग्रेस की बदौलत सीएम बने हैं, इस बात की पुष्टि कर देता है।

इन राजनीतिक परिदृश्यों के बीच कर्नाटक में भी बिहार का इतिहास दोहराया जा सकता है। बिहार की तरह वहां भी सबसे बड़ा दल (कांग्रेस) अपने सरकार का नेतृत्व करने वाले छोटे दल (जेडीएस) पर अपनी मनमर्जी थोप सकता है और उसके लक्षण कर्नाटक में अभी से ही दिख रहे हैं। बिहार में जब सरकार गिरी तो उसका कारण सबसे बड़े दल (राजद) का सरकार का नेतृत्व कर रहे छोटे दल (जेडीयू) पर लगातार दबाव बनाना था।

महागठबंधन सरकार गिरने के बाद सीएम नीतीश कुमार ने कहा था कि जिलों तक में पटना से फोन जा रहे थे। मेरे लिए सरकार चलाना मुश्किल हो गया था। जाहिर है कई पॉवर सेंटर्स के बीच बिहार का प्रयोग कर्नाटक में भी दोहराया जा सकता है।

शपथ ग्रहण और कर्नाटक मंत्रिमंडल गठन के पहले कौन मंत्री बनेगा और कौन नहीं, यह देवगौड़ा ने बेंगलुरु में नहीं बल्कि दिल्ली में तय किआ। जाहिर है रिमोट कंट्रोल दिल्ली में ही रहेगा।

कोई 78 विधायकों वाली सरकार 37 विधायकों वाली पार्टी के नेतृत्व में कब तक काम कर पायेगी। बीस मंत्रियों वाली कर्नाटक सरकार में कांग्रेस की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत और 13 मंत्री बना करके जेडीएस की भागेदारी 35 प्रतिशत होगी। यानी छोटा दल नौ प्रतिशत अधिक पॉवर शेयर करेगा।

इन जटिल राजनीतिक परिस्थितियों के बीच वहां तरह- तरह के स्वाभाविक विवाद भी उभर सकते हैं। अब देखना यह है कि ये सरकार शपथग्रहण के बाद कब गठित होती है।

Source: etv bihar

Leave a Reply

Your email address will not be published.