इंडोनेशिया एक ऐसा मुस्लिम बहुल देश है, जहां राम भी हैं तो गणेश भी हैं। कृष्ण हैं तो अर्जुन भी हैं। यह एक ऐसा देश है जिसकी गली-गली में रामायण-महाभारत के किस्से और कहानियां है। इंडोनेशिया विश्व का सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश है। पर इसकी कुछ बातें इसे भारत के हिंदू धर्म से जोड़ती हैं और लोगों को सोचने पर विवश कर देती हैं।

यह एक ऐसा मुस्लिम देश है जिसके नोटों पर भगवान गणेश की फोटो है। एक ऐसा देश जहां की एयरलाइंस का नाम भी गरूण है। आपको लग रहा होगा कि एक मुस्लिम देश में यह सब कैसे? पर आपने यह जो भी पढ़ा है सब सही पढ़ा है। इंडोनेशिया में हिंदू धर्म का प्रभाव गहरा है। हिंदू धर्म को यहां सरकारी मान्यता भी मिली हुई है।

इतिहासकारों का कहना है कि हिंदू धर्म पहली बार 5वीं शताब्दी में इंडोनेशिया पहुंचा था। भारत और इंडोनेशिया के संबंध हजारों साल पुराने हैं। दोनों देशों में प्राचीन काल से ही व्यापार होता चला आ रहा है। भारत से ही हिंदू धर्म इंडोनेशिया पहुंचा। हिंदू धर्म का इस देश की संस्कृति पर गहरा प्रभाव है। यहां की कला, संस्कृति, मान्यताएं सभी पर हिंदू धर्म की झलक दिखती है।
इंडोनेशिया और रामायण के संबंधो का सबसे दिलचस्प किस्सा तो हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से भी जुड़ा हुआ है।

ऐसा कहा जाता है कि एक बार इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णो के समय पाकिस्तान का एक सरकारी दल इंडोनेशिया की यात्रा पर गया। वहां पर इंडोनेशिया की सरकार ने उनको रामायण का मंचन दिखाया। जिसे देख कर पाक दल के सदस्यों ने राष्ट्रपति से पूछा कि एक इस्लामी मुल्क में रामायण के मंचन का क्या काम? तो राष्ट्रपति सुकर्णो ने तुरंत जवाब देते हुए कहा कि इस्लाम हमारा धर्म है लेकिन रामायण हमारी संस्कृति।


इंडोनेशिया में रामायण, रामायण काल से ही आ गई थी। वाल्मीकि रामायण में किष्किंधा कांड का वर्णन है। सुग्रीव ने सीता को खोजने के लिए अपनी सेना को यवद्वीप और सुवर्ण द्वीप भेजा। इतिहासकारों के अनुसार यह दोनों जगह आज के जावा और सुमात्रा है।

इंडोनेशिया में हिंन्दू धर्म का प्रभाव कितना अधिक है इसका अंदाजा आप वहां के नोटों से लगा सकते है। इंडोनेशिया के नोटों पर भगवान गणेश का फोटो है। दरअसल एक बार इंडोनेशिया की अर्थव्यव्स्था लगातार खराब हो रही थी।
काफी कोशिश करने के बाद भी वह सही रास्ते पर नहीं आ रही थी। जिसके बाद वहां कि सरकार ने भगवान गणेश की फोटो अपने नोटों पर लगाई जिसके बाद से ही इंडोनेशिया की अर्थव्यव्स्था सही होती चली गई।

आप सभी ने भगवद्गीता का एक दृश्य जरुर देखा होगा जिसमें श्री कृष्ण महाभारत के मैदान में अर्जुन को गीता का उपदेश दे रहे है। यह फोटो भारत के घर-घर में कहीं ना कहीं मिल ही जाएगी। लेकिन यह मूर्ति आपको किसी देश के मुख्य चौराहे पर खड़ी मिले तो आप क्या कहेंगे? इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में भगवान कृष्ण की अर्जुन को गीता का संदेश देती विशालकाय मूर्ति वहां काफी प्रसिद्ध है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि इंडोनेशिया में हमारे देश की तरह ही रामायण का मंचन किया जाता है और इसे करने वाले वहां के मुसलमान होते हैं। यहां कि रामायण भारत की रामायण से थोड़ी अलग है। पर कहानी का संदेश और मुख्य किरदार भारत वाले ही हैं। जैसे राजस्थान में कठपुतली का मंचन किया जाता है, वैसे ही इंडोनेशिया में रामायण और महाभारत का मंचन किया जाता है।

वहां अगर आप कहोगे कि रामायण और महाभारत हमारे ग्रंथ है तो इंडोनेशिया के लोग आपसे तुरंत कहेंगे कि ये आपके नहीं हमारे ग्रंथ हैं। इंडोनेशिया के लोग इन्हें अपना ग्रंथ मानते हैं। वहां की झांकी में आपको हनुमान, वानर सेना, कौरव सभी दिख जाएंगे।

भारत के हिंदू धर्म और इंडोनेशिया के हिंदू धर्म में काफी अंतर है। क्योंकि भारत में हिंदू धर्म अपने प्राचीन रुप में ही है पर इंडोनेशिया में यह धर्म कई भागों में गया है। इंडोनेशिया के बाली द्वीप में हिन्दुओं की जनसंख्या अधिक है। बाली का विवरण रामायण से लेकर महाभारत तक में मिलता है। आपको इंडोनेशिया में जगह-जगह मंदिर भी मिलेंगे।

आपको जानकर हैरानी होगी कि इंडोनेशिया की भाषा, साहित्य, कला, राजशाही में भी सनातन हिंदू धर्म का प्रभाव है। यहां की भाषा में संस्कृत के शब्दों की मात्रा काफी ज्यादा है। इंडोनेशिया के पुराने साम्राज्य का नाम श्रीविजया था। जो कि संस्कृत और हिंदू धर्म का शब्द है।

यह देश अपनी रामायण से जुड़ी पहचान को लेकर बहुत सहज है। 2 साल पहले इंडोनेशिया के शिक्षा मंत्री अनीस बास्वेदन भारत दौरे पर आये। वहां उन्होंने यह करते हुए सबको चौका दिया कि रामायण के चरित्रों का इस्तेमाल हम अपने स्कूलों में शिक्षा देने के लिए भी करते हैं।

इंडोनेशिया के शिक्षा मंत्री ने भारत के संस्कृति मंत्री महेश शर्मा से मुलाकात भी की थी। जिसमें इंडोनेशिया के मंत्री ने यह कहकर सुर्खिया बटोरी थी कि हम चाहते है कि भारत के कलाकार इंडोनेशिया आकर रामायण का मंचन करे, और फिर हमारे कराकार यहां आकर रामायण का मंचन करे। इस प्रकार से दोनों देशों की संस्कृति आपस में मिलेंगी।जिससे भारत और इंडोनेशिया के संबंध और अच्छे होगें।

Sources:-Live News

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