धाविका हिमा दास ने वर्ल्ड ऐथलेटिक्स में गोल्ड जीतकर इतिहास रचा. हिमा ने फिनलैंड में आईएएएफ वर्ल्ड अंडर-20 ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर महिला रेस में गोल्ड जीतकर देश को इस चैंपियनशिप में गोल्ड दिलाया. लेकिन भारतीयों के मन में उनकी उपलब्धि के बारे में जानकारी लेने के बजाय कुछ और ही जानना है. गूगल पर हिमा दास की उपलब्धि के बजाय उनकी जाति के बारे में सर्च किया जा रहा है.

गूगल पर उनके नाम के बाद ‘हिमा दास कास्ट’ सबसे ज्यादा सर्च किया गया टॉपिक है. इस बारे में एक ट्विटर यूजर ने लिखा, ‘भारत एक दुखी देश है.’ इनमें सबसे ज्यादा संख्या असम के लोगों की थी, जिसके बाद पड़ोसी अरुणाचल प्रदेश का नंबर आता है.

कुछ लोगों ने यह ट्रेंड नोटिस किया और सोशल मीडिया पर गुस्सार प्रकट किया. यह बेहद अजीब है कि कुछ दिन पहले जिस हिमा दास के पोडियम पर राष्ट्रोगान के समय रोने पर पूरा देश भावुक हुआ जा रहा था, वह अचानक उनकी उपलब्धि से परे उनकी जाति ढूंढने में लगा है. एक और यूजर ने लिखा, “यह भारत का दुर्भाग्य है कि निर्लज्ज लोग हिमा की कास्ट सर्च कर रहे हैं.”

एक अन्य यूजर ने व्यंग्य करते हुए लिखा, “जैसा कि यूजर्स फेमस इंडियन पर्सनैलिटी की कास्ट सर्च करने में व्यस्त हैं. जल्दी ही गूगल कास्ट सर्च के लिए अलग से ब्राउजर खोलेगा, ये सिर्फ भारतीयों के लिए होगा, आधार नंबर के साथ.” एक अन्य यूजर ने लिखा, “यहां तक कि 21वीं सदी में भी कास्ट की संस्कृति हमारी रगों में बहुत अंदर तक धंसी हुई है. ये सिर्फ शर्मनाक ही नहीं दर्दनाक भी है.”

हालांकि यह पहला मौका नहीं जब लोग किसी शख्सियत की जाति जानने में जुटे दिखे हो. इससे पहले बैडमिंटन चैम्पियन पीवी सिंधु ने जब रियो ओलिम्पिक में सिल्वर मेडल जीता तब भी कई लोगों ने गूगल पर उनकी जाति जानने की कोशिश की थी. इनमें आंध्र और तेलंगाना के लोगों खासी तादाद में थे.

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