हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम की दर सात साल में 6 गुना बढ़ी, इस साल भी 20 फीसदी तक इजाफे के संकेत

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कोविड महामारी के कारण एक ओर जहां उपभोक्ताओं के बीच स्वास्थ्य बीमा के प्रति जागरूकता बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर बीमा प्रीमियम बढ़ने से खासकर वरीय नागरिकों, रिटायर्ड कर्मियों के लिए पॉलिसी खरीदना मुश्किल हो रहा है। बीमा प्रीमियम में वर्ष 2015-16 की तुलना में 6 गुना बढ़ोतरी हुई है। बीमा कंपनियां पिछले दो सालों में इंश्योरेंस क्लेम बढ़ने की वजह से प्रीमियम में बढ़ोतरी का हवाला दे रही हैं।

रिटायर्ड बैंक कर्मियों के लिए दो श्रेणी में बीमा दर तय की गई है। कर्मचारी और अधिकारियों के लिए अलग-अलग बीमा राशि और प्रीमियम तय किए गए हैं। वर्ष 2015-16 में रिटायर्ड बैंक कर्मियों के लिए 3 लाख और अधिकारियों के लिए 4 लाख रुपये का चिकित्सा बीमा तय हुआ था। साथ ही, बीमा कंपनियों से समझौता कर क्रमश: 4930 और 6573 रुपये प्रीमियम निर्धारित किया गया। इस पर क्रमश: 690 व 920 रुपये जीएसटी देय था। कुल मिलाकर कर्मचारियों को 5620 और अधिकारियों को 7493 रुपये प्रीमियम देना होता था।

इस प्रीमियम में वित्तीय वर्ष 2020-21 में 6 गुना तक बढ़ोतरी हो गई। हद तो यह है कि वर्ष 2015-16 में जो मूल बीमा प्रीमियम था उससे ज्यादा 2021-22 में जीएसटी देना पड़ रहा है। अब कर्मचारियों को 28 हजार 715 रुपये मूल प्रीमियम और 5269 रुपये जीएसटी यानी कुल 33 हजार 884 रुपये तथा अधिकारियों को 36 हजार 652 रुपये मूल प्रीमियम और 6597 रुपये जीएसटी के साथ कुल 43 हजार 249 रुपये भुगतान करना पड़ रहा है।

साल 2022-23 में बीमा कंपनियों ने प्रीमियम दर में 15 से 20 फीसदी का इजाफा करने के संकेत दिए हैं। अगर ऐसा हुआ तो चिकित्सा बीमा खरीदना आम नागरिक खासकर रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए मुश्किल हो जाएगा।

बैंक संगठन ने केंद्रीय वित्त मंत्री को लिखा पत्र 

ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के महासचिव सीएच वेंकटाचलम ने वरीय नागरिकों के चिकित्सा बीमा प्रीमियम और जीएसटी कम करने के लिए पत्र लिखकर अनुरोध किया है। इस क्रम में ऑल इण्डिया बैंक रिटायरीज फेडरेशन के संगठन मंत्री सुनील श्रीवास्तव ने बताया कि वरीय नागरिकों के हित में सरकार और बैंक प्रबंधन को बीमा प्रीमियम को अनुदानित किया जाना चाहिए और प्रीमियम पर जीएसटी नहीं लिया जाना चाहिए।

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव डीएन त्रिवेदी ने बताया कि बैंक यूनियन्स द्वारा चिकित्सा बीमा प्रीमियम पर जीएसटी नहीं लेने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा गया है। इसके अलावा ऑल इंडिया बैंक एसोसिएशन के साथ प्रस्तावित वार्ता में भी यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स इस मुद्दे को उठाएगा।

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