बॉलीवुड में लगभग 250 फिल्मों में अभिनय का जौहर दिखाने वाले अमरीश पुरी ने अपनी कड़क आवाज, रौबदार भाव भंगिमाओं और दमदार एक्टिंग के बल पर खलनायकी को एक नई पहचान दी थी। आज उनके पुण्यतिथि पर डालते हैं एक नजर उनकी खास बातों पर…

पंजाब के नौशेरां गांव में 22 जून 1932 में जन्में अमरीश पुरी ने अपने करियर की शुरुआत श्रम मंत्रालय में नौकरी से की और उसके साथ साथ सत्यदेव दुबे के नाटकों में अपने अभिनय का जौहर दिखाया। इसके बाद पृथ्वी थियेटर में बतौर कलाकार अपनी पहचान बनाने में सफल हुए।

गमंच से फिल्मों के रूपहले पर्दे तक पहुंचे अमरीश पुरी ने पचास के दशक में हिमाचल प्रदेश के शिमला से बीए पास करने के बाद मुंबई का रुख किया। 40 साल की उम्र में 1971 मे बतौर खलनायक अपने फिल्मी जीवन की शुरुआत की थी। अमरीश पुरी ने खलनायकी को अपने करियर का आधार बनाया। इन फिल्मों में ‘निंशात’, ‘मंथन’, ‘भूमिका’, ‘कलयुग’ और ‘मंडी’ जैसी सुपरहिट फिल्में भी शामिल है।
              
अमरीश नें सबसे पहले अपना मनपसंद और न कभी नहीं भुलाया जा सकने वाला किरदार गोविन्द निहलानी की 1983 मे प्रदर्शित ‘अर्द्धसत्य’ में निभाया। इस फिल्म मे उनके सामने कला फिल्मों के अजेय योद्धा ओमपुरी थे।

हरमेश मल्होत्रा की 1986 मे प्रर्दशित सुपरहिट फिल्म ‘नगीना’ में उन्होंने एक सपेरे की भूमिका निभाया जो लोगो को बहुत भाया। इच्छाधारी नाग को केन्द्र में रख कर बनी इस फिल्म में श्रीदेवी और उनका टकराव देखने लायक था।

1987 में शेखर कपूर बच्चों पर केन्द्रित फिल्म बनाना चाहते थे जो ‘इनविजबल मैन’ के उपर आधारित थी। इस फिल्म में खलनायक के रूप मे ऐसे कलाकार की मांग थी जो फिल्मी पर्दे पर बहुत ही बुरा लगे। इस किरदार के लिए अमरीश का चुनाव किया, फिल्म मे अमरीश ने ‘मौगेम्बो’का किरदार निभाया जो इस फिल्म की पहचान बन गया।

हॉलीवुड से मिले कई ऑफर लेकिन नहीं किया काम

भारत मूल के कलाकार को विदेशी फिल्मों में काम करने की जगह नही मिल पाती है वही अमरीश पुरी ने स्टीफन स्पीलबर्ग की मशहूर फिल्म ‘इंडिना जोंस एंड द टेंपल आफ डूम’ में खलनायक के रूप में काली के भक्त का किरदार निभाया। इसके लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति भी प्राप्त हुई। इस फिल्म के बाद उन्हें हॉलीवुड से कई ऑफर मिले जिन्हे उन्होनें स्वीकार नहीं किया क्योंकि उनका मानना था कि हॉलीवुड में भारतीय मूल के कलाकारों को नीचा दिखाया जाता है।

1995 में आई ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ में काजोल के पिता रौबदार पिता किरदार निभाने के लिए अमरिश को आज भी याद किया जाता है।

लगभग चार दशक तक अपने दमदार अभिनय से दर्शको के दिल में अपनी खास पहचान बनाने वाले अमरीश पुरी 12 जनवरी 2005 को इस दुनिया से अलविदा कह गए।

Sources:-Hindustan

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