हरियाली संरक्षण के लिए आदिवासियों का ग्रीन लॉकडाउन, 400 साल पुरानी परंपरा

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बिहार के बगहा में प्रकृति की रक्षा और हरियाली बचाने के लिए आदिवासी 48 घंटे का ग्रीन लॉकडाउन लगाते हैं। 400 वर्ष पुरानी यह प्रथा बरना पर्व के नाम से जानी जाती है। इस बार बरना पर्व  30 अगस्त से 22 सितंबर के बीच मनाया जाएगा। इसके लिए मोहल्लेवार तैयारी शुरू कर दी गई है।

पेड़ पौधों से पत्तियों को तोड़ने पर अर्थदंड
इस पर्व के माध्यम से आने वाली पीढ़ी को हरियाली बचाने का संकल्प और पुरानी परंपरा की सीख दी जाती है। अखिल भारतीय थारू कल्याण महासंघ के अध्यक्ष दीप नारायण प्रसाद ने बताया कि बरना पर्व के दौरान पेड़ पौधों और घास पत्तों को भी नहीं तोड़ा जाता है। जरूरत की चीजों को दो-तीन दिन पहले ही इकट्ठा कर लिया जाता है।  एक साथ सभी धारू के गांव में यह पर नहीं मनाया जाता है। मोहल्लेवार इसकी तारीख निर्धारित की जाती है। पर्व के दौरान कई बार लोग गलती में दातुन तोड़ लेते हैं, इस पर अंकुश लगाने के लिए अर्थदंड का प्रावधान भी है।

400 साल पुरानी परंपरा
इतिहासकार चंद्रभूषण मिश्रा और श्रीकांत पांडे ने बताया कि थारू 16वीं सदी में जंगल चले गए। उनके पूर्वजों ने 1 देवी देवता की पूजा कर हरियाली बचाने का संकल्प लिया। यहीं से बरना शुरू हुआ। यह थार प्रदेश एवं मध्य नेपाल के वासी हैं ।

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