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भोजपुर आरा में क्यों आये श्रीकृष्ण! जानिए…

आस्था

आरा: आरा भोजपुर का इतिहासिक गांव मसाढ़ जहाँ कई इतिहास छुपा हुआ है. वही कृष्ण ने अपने जीवन में कई लड़ाइयां लड़ीं. उनमें से एक लड़ाई बाणासुर-संग्राम कहलाती है. एक हजार हाथों वाले ताकतवर बाणासुर की राजधानी को लेकर अलग-अलग जगहों के बारे में दावे किए जाते रहे हैं. उनमें से एक जगह है मसाढ़ के दंतेवाड़ा जिसे में स्थित बारसूर कहा जाता है कि बारसूर शब्द बाणासुर से ही आया है.

इंद्रावती नदी के किनारे बसे बारसूर को मंदिरों का शहर कहा जाता है. यहां कभी १४७ तालाब और इतने ही मंदिर हुआ करते थे. बता दे की यहां कभी १४७ तालाब और इतने ही मंदिर हुआ करते थे. अब कई मंदिर टूट चुके हैं, तालाब भी सूख चुके हैं. लेकिन जो बचे हैं वो अब भी देखने लायक हैं. टूरिस्ट और रिसर्चर यह सोचकर चकित हो जाते हैं कि जंगल में रहने वाले आदिवासी कभी इतने समृद्ध भी थे.



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यहां पांच प्रमुख मंदिर अभी बचे हुए हैं मामा-भांजा मंदिर, चंद्रादित्य मंदिर, गणेश मंदिर, बत्तीसा मंदिर और शिव मंदिर. मंदिरों के अलावा वहां बिखरे हुए पुराने अवशेष भी देखने लायक हैं. कृष्ण से क्यों हुई बाणासुर की लड़ाई पौराणिक कहानी ये है कि बाणासुर की बेटी उषा ने कृष्ण के पोते अनिरुद्ध को सपने में देखा और उसे प्यार हो गया.

उसने अपनी सहेली चित्रलेखा को ये बात बताई तो उसने अनिरुद्ध को खोज लिया और जादुई ताकतों से उठाकर महल में ले आई. इसकी खुफिया जानकारी जब बाणासुर को हुई तो उसने अनिरुद्ध को कैद कर लिया. ये बात कृष्ण तक पहुंची. उन्होंने बाणासुर की राजधानी पर अटैक कर दिया घमासान लड़ाई हुई.



बाद में बाणासुर के आराध्य शिव जी की दखलअंदाजी के बाद लड़ाई रुकी और दोनों पक्षों में समझौता हुआ. समझौते के बाद बाणासुर ने खुशी-खुशी बेटी की शादी अनिरुद्ध से कर विदा कर दिया.

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हिस्टोरिकल फैक्ट्स

बस्तर में सबसे ज्यादा समय (७वीं से १३वीं सदी) तक नाग शासकों का साम्राज्य रहा है. उस वक्त राजधानी बालसुर्य हुआ करती थी, जिसका नाम बदलकर बारसूर हो गया है. नाग शासकों ने वारंगल से कारीगरों को बुलाकर बारसूर में १४७ मंदिर और इतने ही तालाब बनवाए थे. बारसूर के अनोखे और प्राचीन मंदिरों के बारे में




मामा-भांजा मंदिर

भगवान शिव के इस मंदिर के इस नाम के पीछे एक कहानी है. मामा-भांजा दो शिल्पकार थे. उन्हें एक दिन में मंदिर बनाने का टारगेट मिला था और उन्होंने वो कर दिखाया. मंदिर के बाहर मामा-भांजे की पत्थर की मूर्तियां भी लगी हुई हैं.

गणेश मंदिर

बारसूर का गणेश मंदिर विश्वप्रसिद्ध है. यहां बलुआ पत्थर से बनी गणेश जी की दो मूर्तियां हैं. बड़ी मूर्ति लगभग साढ़े सात फीट की है और छोटी की ऊंचाई साढ़े पांच फीट है. एक ही मंदिर में गणेश की दो मूर्तियां शायद दुनिया में सिर्फ यहीं है. माना जाता है कि यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी गणेश प्रतिमा है. कहा जाता है कि बाणासुर की बेटी गणेश-भक्त थी. इसलिए उसने ये मंदिर बनवाया था.




बत्तीसा मंदिर

ऐतिहासिक बत्तीसा मंदिर ३२ खंबों पर टिका है. यहां मिले शिलालेख के मुताबिक यह १०३० ईस्वी में बना था. दो गर्भगृह वाले मंदिर में दोनों जगह शिवलिंग स्थापित हैं. कहा जाता है कि एक की पूजा राजा जबकि दूसरे की रानी किया करती थी. मंदिर में स्थापित नंदी की प्रतिमा के बारे में मान्यता है कि उसके काम में प्रार्थना करने से मनौती पूरी होती है.

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