हाजी अली एक अनोखी और बेहद खूबसूरत धार्मिक जगह हैैै, समुद्र की गोद में है मन्नतों की जगह हाजी अली दरगाह

आस्था

यूं तो मुंबई में गेट वे ऑफ इंडिया, मरीन ड्राइव, जुहू चौपाटी, महालक्ष्मी मंदिर सहित आसपास में खंडाला, महाबलेश्वर, माथेरान सहित कई टूरिस्ट प्लेस देखने लायक है. लेकिन महालक्ष्मी स्टेशन पर हाजी अली एक अनोखी और बेहद खूबसूरत धार्मिक जगह हैैै. समुद्र की गोद में होने के चलते यह बेहद आकर्षक भी है.

मुंबई एक जीवंत शहर है. यहां लाइफ स्टाइल हैपनिंग है और समुद्र इसमें और रंग भरता है. यूं तो मुंबई में गेट वे ऑफ इंडिया, मरीन ड्राइव, जुहू चौपाटी, महालक्ष्मी मंदिर सहित आसपास में खंडाला, महाबलेश्वर, माथेरान सहित कई टूरिस्ट प्लेस देखने लायक है. लेकिन महालक्ष्मी स्टेशन पर हाजी अली एक अनोखी और बेहद खूबसूरत धार्मिक जगह हैैै. समुद्र की गोद में होने के चलते यह बेहद आकर्षक भी है.

यहां जाने के लिए मात्र एक पतला रास्ता है जिस पर हमेशा लोगों के आने जाने की भीड़ लगी रहती है दुकानदार भी इस रास्ते पर लगे रहते हैं. लाचार मजबूर, अपंग, अपाहिजों की रास्ते के दोनों किनारों पर कतार लगी रहती है, जो सिर्फ बुलंद आवाज में हाजी अली बाबा और अल्लाह को याद करते हैं. बाहरी दृश्य बहुत ही मनोहर होता है समुद्र की नाचती लहरें आती हैं और मिट जाती हैं, स्टीमर लहरों पर सांप की तरह दौड़ते हैं यहां हिन्दू-मुस्लिम, सिख-ईसाई सभी धर्मों के लोग घूमने व मुरादें लेकर आते हैं.

बेहद खास है मुंबई में हाजी अली
दरअसल हाजी अली की दरगाह की बिल्डिंग संगमरमर के पत्थर से बनीं हुई है. यहां लोग देश-विदेश से घूमने के लिए आते हैं. इस दरगाह में फिल्मों की शूटिंग भी होती है. हाजी अली बाबा से लोग अपनी मुरादें मांगने जाते हैं जो सच्चे और नेक दिल से मांगता है, वह अवश्य पाता है. हाजी अली बाबा की दरगाह को यदि देखना हो तो पर्यटकों को यहां गर्मी के मौसम में आना सबसे बेहतर होगा क्योंकि गर्मी में समुद्र का पानी थोड़ा दरगाह से नीचे सरक जाता है और काले-काले समुद्री पत्थरों की चट्टानें दिखने लगती हैं जो बेहद खूबसूरत दिखाई देती है.

दूसरी बात, गर्मी में समुद्र की ठण्डी-ठण्डी पवन के हरहराते झंकोरे (वैसे झंकोरे सभी मौसम में रहते हैं) से लिपट कर समुद्र की उठती गिरती लहरों का आनंद लेते हुए समुद्र में नहाना एक अलग ही अनुभूति देगा. इसके अलावा दरगाह से सामने दिखाई देता महालक्ष्मी रेसकोर्स और सामने दिखता चमकती मुंबई का नजारा आपका दिन बना देगा.

दुआ मांगते हैं लोग पूरी होती है मन्नतें
कहा जाता है बाबा हाजी अली की दरगाह पर हर दुआ कबूल होती है और एक की मन्नतें पूरी होती है. यहां सभी धर्मों के लोग दिखाई देते हैं. कुछ सालों पहले तक यहां महिलाओं का आना वर्जित था, लेकिन एक कानूनी लड़ाई के चलते कहा जाता है महिलाओं को भी यहां प्रवेश की अनुमति मिल गई है.

दरगाह के अन्दर मजार के अलावा जगहों पर किस्म-किस्म के पुष्पों के हार और चादर की, साथ में नाना प्रकार की मिठाइयों की भी दुकानें लगी रहती हैं जहां से फूल-मिठाई खरीद कर मजार पर रख दिया जाते हैं, जिसकी फातिहा होती है बाबा की उम्मती मजार पर बिछाई चादर को अदब से चूम कर दुआ मांगता है. दोबारा रखे गये फूल-मिठाइयों के आधे अंश को वापस उठाकर उल्टे कदम मजार से बाहर निकल आता है और वापस लाई गई मिठाई को सिन्न कहते हैं.

धागों से जुड़ी है मन्नतों की कहानी
दरगाह में सजावट के पेड़ भी लगाए गये हैं जो सुन्दरता बढ़ाने के साथ-साथ लोगों के मन्नतों के धागे बांधने का भी कार्य करते हैं अर्थात् लोग उन पेड़ों के तने में अपनी मन्नत के धागे बांध कर चले जाते हैं और मन्नत पूर्ण होने पर दोबारा आकर धागा खोलते हैं. पेड़ के तने में इतना धागा बांधा गया कच्चा धागा कैसे पहचान में आयेगा, इसलिए उन बंधे धागों में से कोई भी एक धागा खोल दिया जाता है.


जहां एक तरफ बाबा के दर्शन के लिए लेागों की भीड़ जमी रहती है, वहीं दूसरी ओर मौलवी-मौलानों के कुरान-तेलावत की महफिल लगी रहती है. यहां खैरात किए गए पैसों की गिनती नहीं की जाती बल्कि उन्हें छन्ने से चाला जाता है जो क्रमानुसार एक रुपया, दो रुपया, पचास पैसा के सिक्के अलग किये जाते हैं. इस धन राशि को अलग करके, बोरे में भर कर, सिलाई मार कर छल्ला दिया जाता है, बनिये के गल्ले के समान.

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