गया में तैयार हो रहीं 3 टेंट सिटी, पिंडदान के लिए आने वालों को मिलेगी सुविधा

आस्था

बिहार के गया में पितृपक्ष मेले को लेकर तैयारियां तेज हो गयी हैं। पितृपक्ष मेला में पहली बार टेंट सिटी की व्यवस्था की गई है। गया के गांधी मैदान में दो और घुघारी टांड बाइपास स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज में एक टेंट सिटी बनाई गई है। प्रत्येक में पांच-पांच हजार लोगों के ठहरने की व्यवस्था होगी। तीर्थयात्री यहां ठहरने के लिए संवास सदन समिति कार्यालय, गया और जिला पर्यटन शाखा गया से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में ठहरने की व्यवस्था की गई है। कुल मिलाकर एक दिन में 65 हजार लोगों के ठहरने की व्यवस्था रहेगी।

मेला क्षेत्र में बस की मिलेगी सुविधा


गया से बोधगया के लिए सिटी बस सेवा शुरू होगी। इसके अलावा दूर पिंडवेदियों तक जाने के लिए भी बसें मेला क्षेत्र में उपलब्ध रहेंगी। मेला क्षेत्र में 50 ई-रिक्शा उपलब्ध कराए गए हैं। जो दिव्यांग और वृद्धों को विष्णुपद मंदिर के पास तक पहुंचाएंगे।

ऐप और वेबसाइट के जरिए मिलेगी मदद 
पहली बार आईवीआरएस (इंटरएक्टिव वॉयस रिस्पांस सिस्टम) की सुविधा मुहैया करायी जा रही है। पिंडदान से संबंधित एप और वेबसाइट भी है। आईवीआरएस का नंबर 9266628168 है। मोबाइल एप PINDDAAN GAYA व www.pinddaangaya.bihar.gov.in वेबसाइट तीर्थयात्रियों के लिए काफी मददगार साबित होगा।

8 लाख से अधिक पिंडदानियों का अनुमान
श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के सचिव व गयापाल गजाधर लाल पाठक ने बताया कि दो साल बाद लग रहे पितृपक्ष मेले में आठ लाख से अधिक पिंडदानियों के आने का अनुमान है। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि हर साल की तरह ही सारी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

10 सितंबर से पिंडदान की शुरुआत
आचार्य नवीनचंद्र मिश्र वैदिक ने बताया कि नौ सितंबर (भाद्रपद चतुर्दशी) को पुनपुन नदी या गया स्थित गोदावरी से त्रिपाक्षिक पिंडदान शुरू होगा। पुनपुन नदी में श्राद्ध करके ही गया आने का विधान है। अगर कोई सीधा गयाजी आते हैं वे यहां के गोदावरी तालाब में पिंडदान के साथ त्रिपाक्षिक पिंडदान शुरू करेंगे। गया में 10 सितंबर को फल्गु से पिंडदान की शुरुआत होगी। 11 सितंबर को प्रेतशिला में। इसी तरह विभिन्न वेदियों पर तिथिवार पिंडदान होगा। 25 सितंबर को अक्षयवट में शैय्यादान और पंडाजी से सुफल लेने के साथ गयाश्राद्ध संपन्न होगा। त्रिपाक्षिक गयाश्राद्ध करने वाले 26 सितंबर को गायत्री घाट पर नाना-नानी के लिए पिंडदान करने के बाद गयाधाम से लौटेंगे।

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