मंगलवार 16 जुलाई यानी कि कल गुरुपूर्णिमा थी । गुरु हर क्षेत्र में महत्व रखते हैं चाहे ज्ञान ज्ञान हो, गीत-संगीत हो या फिर नृत्य कला। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस और भरतनाट्यम डांसर हैं।

वहीदा को बचपन से ही भरतनाट्यम का शौक था और वो अक्सर अपनी अम्मी से जिद करती थीं कि उन्हें किसी अच्छे उस्ताद यानी गुरु से उन्हें तालीम दिलवाई जाए। जब वहीदा जिद पर अड़ी रहीं तो उनकी अम्मी उन्हें भरतनाट्यम के मशहूर गुरु जयलक्ष्मी अल्वा के पास ले गईं।

वहीदा ने जब जयलक्ष्मी अल्वा को सलाम किया तो उन्होंने पूछा, ‘मुस्लिम हो?’ जवाब में हां में मिला। इसके बाद अल्वा ने कहा, ‘मैं मुस्लिम को भरतनाट्यम नहीं सिखाती। चार दिन सीखोगी, फिर घर और खानदान के डर से सीखना बंद कर दोगी। मैं ऐसी शिष्या नहीं बनाती, जो तालीम अधूरी छोड़ दे।” जब गुरूजी ने भरतनाट्यम सिखाने से इनकार कर दिया तो वहीदा जिद पर अड़ गईं।

वहीदा की जिद के चलते अलावा ने एक एक शर्त रखी । उन्होंने कहा, ‘अगर कुंडली में हुआ कि तुम मुझसे सीखकर किसी काबिल बनोगी तो ही मैं तुम्हे भरतनाट्यम सिखाऊंगी।’ वहीदा के पास कुंडली नहीं थी और न ही ला सकती थीं। लेकिन भरतनाट्यम सीखने की उनकी जिद बरकरार थी। तब गुरूजी ने उनसे उनकी जन्मतिथि, समय, स्थान समेत सारी जानकारी ली और कहा, “तुम कल आना, मैं खुद ही कुंडली बनाकर देख लूंगी, फिर फैसला लूंगी।”

अगले दिन बदला हुआ था गुरुजी का बर्ताव

जयलक्ष्मी अल्वा ने रातभर मेहनत की और वहीदा की जन्म कुंडली बनाई। अगले दिन शाम को जन्म वहीदा वहां पहुंचीं तो गुरुजी ने उनका जोरदार स्वागत किया। उनका व्यवहार एकदम अलग था। यह देख वहीदा और उनकी मां हैरान थीं। तब गुरुजी ने कहा, “कल से तालीम लेने आ जाओ। मैं देख लिया, पढ़ लिया।

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