गुंजन सक्सेना, भारतीय वायुसेना की वो पायलट जिसने कारगिल में पाकिस्तान को युद्ध में धूल चटा दी

जानकारी

फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना ये वो नाम हैं जो समय के साथ कहीं खो गया। दरअसल गुंजन अपनी साथी श्रीविद्या के साथ कारगिल युद्ध के दौरान लड़ाई में भारत की तरफ से लड़ने वाली पहली महिला पायलट थीं। गुंजन को उनके साहस के लिए शौर्य वीर चक्र अवॉर्ड दिया गया था।

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक 20 साल पहले कारगिल युद्ध के दौरान लड़ाई में गुंजन और श्रीविद्या को युद्ध क्षेत्र में भेजा गया। तब दोनों ने पहली बार छोटा चीता हेलिकॉप्टर उड़ाया था। उस इलाके में पाक सैनिक बुलेट और मिसाइलों से एयरफोर्स के हेलिकॉप्‍टर्स और एयरक्राफ्ट्स को देखते ही निशाना बना रहे थे। वहीं इन दोनों के छोटे चीता हेलिकॉप्‍टर में कोई हथियार नहीं था। ऐसे में दोनों अपना सेल्फ डिफेंस भी नहीं कर सकती थी। इसके बावजूद दोनों महिला पायलट ने उत्तरी कश्मीर के इलाके में कई उड़ाने भरी। साथ हीं भारतीय सेना के घायल जवानों को सुरक्षित निकाला।

कारगिल लड़ाई के दौरान पाक सैनिकों की पॉजिशंस का पता लगाने के लिए दोनों अक्सर पाक पॉजिशंस के बेहद करीब से उड़ान भरती थीं। ऐसे में एक बार गुंजन पर सीधा हमला हुआ। पाक सैनिक ने रॉकेट या कंधे के सहारे दागी जाने वाली मिसाइल सीधे उनके एयरक्राफ्ट पर दाग दी। हालांकि उनका निशाना चूक गया और वह एयरक्राफ्ट के पीछे पहाड़ी पर जाकर फटा। गुंजन ने अपने साथ पूरी तरह से भरी हुई इंसास राइफल और एक रिवॉल्‍वर के साथ अपनी उड़ान को जारी रखा।

गुंजन का जन्म एक आर्मी फैमली में हुआ था। उनके पिता और भाई दोनों ही आर्मी में थे ऐसे में उन्होंने भी आर्मी ज्वॉइन करने का फैसला किया। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज से ग्रेजुएशन की और इसके बाद एयरफोर्स ज्वॉइन किया। 1994 में गुंजन और श्रीविद्या एयरफोर्स के वुमन बैच की 25 महिला ट्रेनी पायलट में से थीं। शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी के रूप में उनका कार्यकाल सात साल के बाद खत्म हो गया। उन्होंने भारतीय वायु सेना के एमआई-17 हेलिकॉप्‍टर के पायलट से शादी कर ली। गुंजन के मुताबिक कारगिल के दौरान भारतीय सेना के घायल जवानों को सुरक्षित निकालकर लाना उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा थी। वह कहती हैं कि एक हेलिकॉप्टर पायलट होने के नाते यह सबसे अच्छी फीलिंग होती है

Sources:-Live News

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