इस ‘घास स्पेशल’ ट्रेन से रेलवे भी परेशान, आदमी की जगह नजर आता है घास

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कोशी क्षेत्र में चलने वाली इस ट्रेन के देखकर आप ‘घास स्पेशल’ कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। नाम तो सुनने में अजीब जरूर है, लेकिन ट्रेन की स्थिति देखने के बाद आप भी यही कहेंगे।

यह ट्रेन समस्तीपुर से सहरसा तक जाती है और पुरी ट्रेन में यात्री कम और जानवरों को खिलाने वाली घास ज्यादा लदी रहती है। ट्रेन की बोगियों में घास की वजह से सिर्फ यात्रियों को ही नहीं, बल्कि ट्रेन के ड्राइवर भी खासे परेशान रहते हैं।

समस्तीपुर से सहरसा जाने वाली सवारी गाड़ी इन दिनों ‘घास स्पेशल’ ट्रेन के नाम से प्रसिद्ध है। ट्रेन के दरवाजे हों या खिड़की सभी जगहों पर सिर्फ घास ही लदा रहता है।

दरअसल इन दिनों खगड़िया के कोशी क्षेत्र के अधिकांश इलाका पानी से घिरा हुआ है। ऐसे में पशुपालकों को जानवरों के लिए हरा चारा के आभाव हो गया है। ऐसें में दूर जाकर पशुचारा का व्यवस्था करना पड़ता है। सैकड़ो की संख्या में पशुपालक भूखे-प्यासे सुबह से शाम तक अपनी जान जोखिम में डालकर पशु के लिए चारा के जुग्गत में लगे रहते हैं।
पशुपालकों का आरोप है कि उन्हें सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही है। पशुपालकों की संख्या अधिक और ट्रेनों की संख्या कम होने के कारण पशुपालक ट्रेन की खिड़की और दरवाजे पर घास लटका कर लाते हैं। इस वजह से ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को भी काफी परेशानी होती है।

रेलवे के अधिकारी भी जिले के भौगौलिक स्थिति को देखते हुए दबी जुबान से घास ट्रेन पर पशुपालकों को परेशान नहीं करने की बात बताते हैं। नियम को तहत आरपीएफ को यात्रीयों को परेशानी नहीं हो इसके लिए भी निर्देश दिया जाता है।

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