governor satya pal malik

अभावों में गुजरा बिहार के नए गवर्नर सत्यपाल मलिक का बचपन, पर हिम्मत नहीं हारी

राजनीति

बिहार के नवनियुक्त राज्यपाल सत्यपाल मलिक का जन्म यूपी के बागपत जिले के हिसवाड़ा में सामान्य किसान परिवार में हुआ। उनका जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी।

वे महज 3 साल के थे, जब उनके पिता बुध सिंह की मौत हो गई। तब मां जुगनी देवी ने तमाम चुनौतियों से जूझते हुए उनका लालन-पालन किया।

 

बचपन से ही मलिक अपनी मां का खेती में हाथ बंटाते थे और खुद चारे का जुगाड़ करते। उन्होंने अपने पड़ोस के ढिकौली गांव से इंटर तक की पढ़ाई पूरी की और स्कूल जाने के लिए भी दूसरे की साइकिल का सहारा लेते थे। उन्होंने बीएससी और एलएलबी की पढ़ाई मेरठ यूनिवर्सिटी से की।

 

मलिक 21 अप्रैल, 1990 से 10 नवंबर, 1990 तक केंद्रीय पर्यटन एवं संसदीय राज्यमंत्री रह चुके हैं। इसके पहले वे 1980 से 84 और 1986 से 1989 तक राज्यसभा सांसद और 1989 से 1990 तक लोकसभा सांसद के साथ-साथ 1974 से 1977 तक उत्तरप्रदेश विधानसभा के सदस्य थे। वे लोकदल और जनता दल के सदस्य रहे। बाद में भाजपा में शामिल हुए और इसके राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुए।

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मलिक ने 1989 में जनता दल के टिकट पर अलीगढ़ से लोकसभा का चुनाव लड़ा और 51.5 फीसदी वोट लाकर जीत दर्ज की। उन्होंने 1966-67 में मेरठ कालेज से बीएससी और 1970 में एलएलबी की। उन्होंने मेरठ काॅलेज में छात्रसंघ की नींव डाली। उस समय तक वहां छात्रसंघ चुनाव की परंपरा नहीं थी।

 

वे प्रीमियर छात्रसंघ अध्यक्ष बने और खुद दिलचस्पी लेकर चुनाव की नियमावली बनाई और फिर उसी आधार पर चुनाव लड़कर दो बार अध्यक्ष बने। इस चुनाव के दौरान उनसे मिलने कद्दावर नेता चौधरी चरण सिंह भी मेरठ कालेज आए थे।

आज भी वही नियमावली वहां चुनाव का आधार है। मलिक ने कहा-मैं जिस पद पर जा रहा हूं उसका काफी महत्व है। मुझसे पहले वहां जो शख्स थे, आज वे देश के राष्ट्रपति हैं।

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