मैथिली-भोजपुरी-मगही भाषा में पढ़ेंगे सरकारी स्कूल के बच्चे, नीतीश सरकार का आदेश जारी

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Patna: बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा अब क्षेत्रीय भाषा में दी जाएगी। शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बुधवार को विधानसभा में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा में शिक्षा को लेकर स्पष्ट निर्णय है। यह बच्चों में न केवल विश्वास पैदा करेगा बल्कि वे विषयों को सहजता से समझ सकेंगे। प्रारंभिक शिक्षा का माध्यम उनकी अपनी भाषा में होना इन्हें सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा। मंत्री सदन में विभाग के बजट पर सामान्य चर्चा के दौरान सरकार का पक्ष रख रहे थे। मंत्री की इस घोषणा से भोजपुरी, मैथिली, अंगिका, बज्जिका, मगही आदि इलाकों में छात्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। हालांकि पहले मैथिली, भोजपुरी व मगही से इसकी शुरुआत होगी। मंत्री की घोषणा के बाद जब शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार से दैनिक भास्कर ने पूछा कि यह कब तक लागू होगा तो उन्होंंने कहा कि अगले सत्र यानी 2021-22 सत्र से

मातृभाषा में पढ़ाई शुरू होने की संभावना है।
मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में जीडीपी का 6 फीसदी शिक्षा पर खर्च करने की बात की गई है। बिहार में हम इस स्तर को अभी ही प्राप्त कर चुके हैं। बजट का 22 फीसदी शिक्षा के लिए आवंटित है। 4 मार्च को रेणु की जन्मशताब्दी है। ऐसे में हम शिक्षा को लेकर उनके दिखाए रास्ते और मार्गदर्शन का अनुपालन करने को संकल्पित हैं। यह रेणु के प्रति हमारी विनम्र श्रद्धांजलि भी होगी।

सभी पंचायतों में 9वीं की पढ़ाई शुरू
मंत्री ने बताया कि सूबे में 8386 पंचायतों में 5082 में उच्च माध्यमिक स्कूल संचालित हैं। शेष 3304 पंचायतों में उच्च माध्यमिक विद्यालय की स्थापना वहीं के चिह्नित मध्य विद्यालय में करते हुए वर्ग 9 की पढ़ाई प्रारंभ कर दी गई है। संबंधित पंचायत में भूमि की उपलब्धता के मद्देनजर नए विद्यालय भवन का निर्माण क्रमिक रूप से किया जाएगा। इस प्रकार अब बिहार के सभी पंचायतों में उच्च माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं।

क्षेत्रीय अधिकारियों को दी हिदायत, कहा- शिक्षकों को परेशान न करें
मंत्री ने कहा कि हमने शिक्षा को लेकर आधारभूत संरचना और अन्य पहलुओं पर काफी बेहतर काम किया है, अब हमारा फोकस लर्निंग आउटकम पर है। हम देखेंगे कि हमारा लर्निंग आउटकम क्या है? हमारे बच्चे क्या पढ़ रहे हैं? हमारा टारगेट वास्तविक शिक्षा को लेकर है। हमारे शिक्षक शिक्षा की समस्या देखें, हम शिक्षकों की समस्या देखेंगे। मंत्री ने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों के हिदायत देते हुए कहा कि वे शिक्षकों को परेशान न करें। साथ ही शिक्षकों से भी अनुरोध किया कि वे शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए हर स्तर पर पहल करें। हमारे शिक्षक शिक्षा को लेकर ऐसा कार्य करें ताकि विपक्ष के सदस्यों के जितने सवाल हैं, वे स्वत: उत्तरित हो जाएं।

मंत्री को घेरने के चक्कर में खुद घिर गए माले के महबूब आलम
शिक्षा मंत्री ने माले के महबूब आलम की आपत्ति पर उन्हें ही घेर लिया। दरअसल, आलम ने प्रारंभिक शिक्षा क्षेत्रीय भाषा में देने की घोषणा पर उन्हें घेरा और कहा क्या इसमें उर्दू नहीं है? मंत्री बोले-आप उर्दू को नीचे लाना चाहते हैं? उर्दू दूसरी राजभाषा है। उसका स्थान काफी ऊपर है। यहां क्षेत्रीय भाषाओं की बात हैं।

तेजस्वी विरोध करते रहे पर विपक्ष ने नहीं किया वाकआउट
शिक्षा मंत्री के अभिभाषण के दौरान विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव सदन में मौजूद थे। उन्होंने जवाब पर कुछ आपत्ति दर्ज की, लेकिन पांच बजने के कारण विधानसभा अध्यक्ष ने उन आपत्तियों को उठाने की इजाजत नहीं दी। फिर भी तेजस्वी विरोध करते रहे। लेकिन, विपक्ष ने सदन से वाकआउट नहीं किया।

मंत्री बोले- कीर्तिमान बना रही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
मंत्री ने बताया कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति आज नित्य नये कीर्तिमान स्थापित कर रही है। वर्ष 2020 में समिति द्वारा लगातार दूसरे वर्ष देश में सबसे पहले मैट्रिक एवं इंटर का परीक्षाफल जारी किया गया। इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षाफल कम समय में दिनांक 24 मार्च 2020 को जारी किया गया।

अपर मुख्य सचिव बोले-शिक्षकों की बहाली जैसे मुद्दों पर फैसला बाद में
पटना। मातृभाषा में पढ़ाई के लिए फिलहाल मैथिली, भोजपुरी और मगही भाषा में पाठ्यचर्या तैयार हाेगा। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार ने बताया कि विभाग इसकी तैयारी कर रहा है। इन विषयों में शिक्षकों की बहाली और अन्य मुद्दों पर भी निर्णय बाद में होंगे। अगले साल सत्र शुरू होने पर पढ़ाई शुरू होने की उम्मीद की जा रही है।

Source: Daily Bihar

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