भगवान सूर्य की प्रतिमा उतर आती है धरती पर, बेलाउर सूर्य मंदिर में सबकी मनोकामना होती है पूरी

आस्था

पटना: भोजपुर जिले के बेलाउर में छठ व्रत करने का अपना महत्व है। यहां भगवान सूर्य का एक भव्य मंदिर है जो पूर्वाभिमुख न होकर पश्चिभिमुख है। यह मंदिर छठ मे व्रतियों के लिए पूजा का मुख्य केंद्र बन जाता है। जहां छठ के मौके पर यहां दूर-दूर से लोग भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करने आते हैं।

यहां छठ महापर्व के दौरान प्रति वर्ष एक लाख से अधिक श्रद्धालु आते है जिनमे उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के श्रद्धालु भी होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि सच्चे मन से इस स्थान पर छठ व्रत करने वालों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है तथा कई रोग-व्याधियों से भी मुक्ति मिलती है।

आरा-सहार पथ पर बेलाउर का सूर्य मंदिर स्थित है। जहां प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु विभिन्न जिलों से मनौती पूर्ण होने पर उज्जवल भविष्य की कामना करने के लिए श्रद्धा और विश्वास के साथ आते हैं। संवत् 2007 में मौनी बाबा (करवासीन) निवासी ने मंदिर का निर्माण कराया। प्रचलित है कि इसके पूर्व उन्होंने 12 वर्षो तक साधना की थी। उसी क्रम में भगवान सूर्य की मंदिर बनवाने की इच्छा प्रकट की।

मंदिर में सात घोड़े वाले रथ पर सवार भगवान भास्कर की प्रतिमा ऐसी लगती है मानों वे साक्षात धरती पर उतर रहे हों। उनकी मनोरम छवि का दर्शन कर श्रद्धालु प्रसन्न हो जाते हैं। मंदिर के चारों कोने पर मकराना संगमरमर से बनी दुर्गा जी, शंकर जी, गणेश जी और विष्णु जी की प्रतिमा है। पोखरा के ठीक बीचोबीच निर्मित मंदिर आकर्षक और भव्य दिखाई पड़ती है। सूर्य मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि बेलाउर का यह मंदिर श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। सदस्य छठ व्रतियों की सुविधा और व्यवस्था हेतु काफी सक्रिय हैं

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