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लड़कियां पढ़ाई न छोड़ें इसलिए बिहार के इस संत ने खोल दिया 3 कॉलेज, अब यूनिवर्सिटी खोलने की ठानी

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बिहार में शिक्षा को कितना महत्व दिया जाता है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं की यहाँ एक संत ने कॉलेज बनवाया।

यह कहानी है एक ऐसे इंसान की है, जो निरक्षर था। उसे अक्षरों का ज्ञान नहीं था। उस संत ने शिक्षा की अलख जगाई है। अब तक दो इंटर और एक डिग्री कॉलेज की स्थापना करा चुके हैं।

अब यूनिवर्सिटी खोलने के लिए प्रयासरत हैं। यह जज्बा, जुनून और समर्पण सारण के सराय बक्स में एक मठ में रह रहे संत श्रीधर दास का है। वे संत देवराहा बाबा के शिष्य हैं।

श्रीधर दास करीब 35 वर्षों तक साधना में रहे। 1978 में अपने गांव दिघवारा हराजी लौटे। फिर समाज के लिए कुछ करने की इच्छा लेकर गड़खा आ गए। बचपन में उनका नाम शिवपूजन राय था। जब वे गृहत्याग के बाद देवराहा बाबा से मिले थे तो उनकी उम्र 17 साल थी।

देवराहा बाबा ने ही उन्हें श्रीधर दास का नाम दिया था। गड़खा आने के बाद वे गांव-गांव घूमे और कॉलेज के लिए सहयोग मांगा। एक एक रुपया जमाकर 1984 में कदना,गड़खा में देवरहवा बाबा श्रीधर दास इंटर कॉलेज की नींव रखी।
कॉलेज में पढ़ाई शुरू हुई। इसके बाद श्रीधर दास ने 1988 में भेल्दी में इसी नाम से कॉलेज खोला। फिर भिक्षाटन शुरू किया और रामपुर में 10 एकड़ जमीन खरीद डिग्री कॉलेज का अलग भवन बनवाया। गड़खा और भेल्दी जिला मुख्यालय से 15-25 किमी.दूर है। पहले यहां एक भी कॉलेज नहीं था।



 

लड़कियां 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते थे। लेकिन कॉलेज खुलने के बाद लड़कियां भी स्नातक तक पढ़ाई कर रही हैं। श्रीधर दास करीब 35 वर्षों तक साधना में रहे। 1978 में अपने गांव दिघवारा हराजी लौटे।

फिर समाज के लिए कुछ करने की इच्छा लेकर गड़खा आ गए। बचपन में उनका नाम शिवपूजन राय था।



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238जब वे गृहत्याग के बाद देवराहा बाबा से मिले थे तो उनकी उम्र 17 साल थी। देवराहा बाबा ने ही उन्हें श्रीधर दास का नाम दिया था।

गड़खा आने के बाद वे गांव-गांव घूमे और कॉलेज के लिए सहयोग मांगा।

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