घोड़े के आकार का है घोड़ाकटोरा, सम्राट अजातशत्रु का कभी यहां था अस्तबल !!

इतिहास

नाम घोड़ाकटोरा। घोड़े के आकार का है घोड़ाकटोरा। मगध सम्राट अजातशत्रु का कभी यहां अस्तबल हुआ करता था। यहीं से वे अपने सैनिकों के साथ युद्ध के समय इकट्ठा होकर जाया करते थे। इस कारण भी इसे घोड़ाकटोरा नाम दिया गया। हालांकि इस डैम के पास ही घोड़ाकटोरा नाम का एक गांव भी है। बिहार के राजगीर जाएं तो घोड़ाकटोरा जरूर जाएं। राजगीर रोपवे के पास से जंगल होते हुए 6.5 किमी लंबी सड़क आपको घोड़ाकटोरा ले जाएगी। यहां तक पहुंचने के लिए गाड़ियां नहीं चलतीं। तांगा या फिर बैट्री चालित गाड़ियां चलती हैं। अब आपको बता दें कि घोड़ाकटोरा क्यों खास है।

घोड़ाकटोरा प्रकृति की गोद में बसा हुआ है। पांच पहाड़ियों से घिरा हुआ। घने जंगल के बीच। मनोरम छंटा। हरियाली इतनी कि पूछिए मत। पहाड़ियों के बीच छोटा डैम। साफ-निर्मल-स्वच्छ पानी। बोटिंग का आनंद लेने का इससे बेहतर जगह नहीं। दिसंबर-जनवरी में तो यहां पर्यटकों का तांता लगा रहता है। घोड़ाकटोरा डैम देश-विदेश के पर्यटकों को लुभा रहा है। बांस के शेड बने हुए हैं जो काफी खूबसूरत लगते हैं। यहां आकर पर्यटकों को एक अलग अनुभूति होती है। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय मंत्री डॉ. धीरेन्द्र उपाध्याय जी बताते हैं कि इस स्थल का आकार प्राकृतिक रूप से घोड़ानुमा दिखता है।

70 फुट ऊंची भगवान बुद्ध की प्रतिमा
घोड़ाकटोरा डैम में भगवान बुद्ध की 70 फुट ऊंची मू्र्ति लगायी जा रही है। फाउंडेशन का काम पूरा हो चुका है। प्रतिमा बनाने का काम चल रहा है। जल्द ही पर्यटकों को यहां भगवान बुद्ध की प्रतिमा देखने को मिलेगी। यह प्रतिमा सैंड स्टोन से बनायी जा रही है। प्रतिमा के लिए उत्तरप्रदेश के मिर्जापुर से पत्थर मंगाये गये हैं।



रात में ठहरने की नहीं है व्यवस्था
घोड़ाकटोरा जाने के लिए सुबह आठ बजे से लेकर शाम के तीन बजे तक तांगा से जाने की अनुमति है। शाम पांच बजे तक वहां से हर हाल में वापस आना होता। वहां पर ठहरने की व्यवस्था नहीं है।

दिसम्बर व जनवरी सबसे बेहतर
घोड़ाकटोरा डैम में दिसम्बर व जनवरी में पर्यटकों की भरमार रहती है। देश और विदेश के पर्यटक राजगीर आते हैं तो घोड़ाकटोरा जाना नहीं भूलते हैं। अप्रैल 2017 से 13 जनवरी 2018 तक कुल 5,741 पर्यटकों ने घोड़ाकटोरा डैम में वोटिंग की है। इसमें दिसम्बर 2017 में सबसे अधिक 1488 पर्यटकों ने वोटिंग की। वहीं जनवरी 2018 में 13 तारीख तक 530 पर्यटकों ने वोटिंग की है।



कैसे पहुंचे घोड़ाकटोरा
राजगीर शहर से 12 किलोमीटर की दूरी पर जंगल क्षेत्र में यह मनोरम इकोटूरिस्ट स्थल बसा है। यहां पहुंचने के लिए दूसरे राज्यों व विदेश से आने वाले पर्यटक बोधगया व पटना एयरपोर्ट पर उतरने के बाद बस या फिर नीजि वाहन से राजगीर आ सकते हैं। बोधगया से राजगीर की दूरी 80 किलोमीटर है। गया से बुद्ध-पूर्णिमा एक्सप्रेस आती है जो पटना होते हुए आती है। पटना से राजगीर आने के लिए सड़क व रेल दो रास्ते हैं। पटना से राजगीर के लिए श्रमजीवी एक्सप्रेस, इंटरसिटी एक्सप्रेस, राजगीर-दनियावां पैसेंजर, दानापुर-राजगीर-तिलैया पैसेंजर से आ सकते हैं। इसकी दूरी 100 किलोमीटर है। वहीं पटना से बख्तियारपुर व फतुहा होते हुए बस से भी राजगीर आ सकते हैं। इसकी दूरी भी 100 किलोमीटर है। ट्रेन से पर्यटक कोलकता के हावड़ा से भी सीधे आ सकते हैं। वहां से राजगीर के लिए राजगीर-हावड़ा फास्ट पैसेंजर ट्रेन रोज खुलती है। राजगीर शहर से छह किलोमीटर की दूरी पर रोपवे है। वहां से घोड़ाकटोरा डैम जाने के लिए तांगा आसानी से मिल जाता है। तांगा वाले एक सवारी का किराया एक सौ रुपये लेते हैं। तांगा के आने में 40 मिनट का समय लगता है।



सीएम के प्रयास से पर्यटक स्थल के रूप में हुआ विकसित
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 2009 में पहली बार अपने प्रवास यात्रा के दौरान राजगीर आये थे। उस समय दांगी टोला निवासी अनुप कुमार के अलावा कई लोगों ने घोड़ा कटोरा डैम के बारे में बताया था। उसके बाद वे जंगली रास्ते से होकर वे पहली बार घोड़ाकटोरा पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने देखने के बाद कहा था कि यह काफी मनोरम स्थल है। उसके बाद इस स्थल की तकदीर बदली और यह सूबे का पहला इकोटूरिस्ट स्थल के रूप में विकसित हुआ। इसका उद्घाटन 29 जनवरी 2011 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था। इसके बाद से इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया गया।

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