gayatri-mantra

बहुत पावरफुल है गायत्री मंत्र, जाप से स्टूडेंट को याद आ जाता है भूला पाठ

आस्था

शास्त्रों के अनुसार गायत्री मंत्र को वेदों का सर्वश्रेष्ठ मंत्र बताया गया है। गायत्री मंत्र महामंत्र हैं, इस मंत्र के अधिष्ठाता देव सूर्य हैं। जब हम गायत्री-मंत्र का जाप करते हैं, तो ब्रह्माण्ड के मानस-माध्यम में एक विशिष्ट प्रकार की असाधारण तरंगें उठती हैं, जो सूर्य तक पहुंचती हैं और उसकी प्रतिध्वनि लौटते समय सूर्य की दिव्यता, प्रकाश, तेज, ताप और अन्य अलौकिक गुणों से युक्त होती हैं और साधक को इन दिव्य-अणुओं से भर देतीं हैं। साधक शारीरिक,मानसिक और अध्यात्मिक रूप से लाभान्वित होता है।

इस मंत्र के नियमित जाप से त्वचा में चमक आती है, नेत्रों में तेज आता है, क्रोध शांत होता है, ज्ञान की वृद्धि होती है। विद्यार्थियों के लिए यह मंत्र बहुत लाभदायक है। रोजाना इस मंत्र का 108 बार जप करने से विद्यार्थी को सभी प्रकार की विद्या प्राप्त करने में आसानी होती है। पढ़ने में मन नहीं लगना,याद किया हुआ भूल जाना,शीघ्रता से याद न होना आदि समस्याओं से भी मुक्ति मिल जाती है।

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इसके जप के लिए तीन समय बताए गए हैं। गायत्री मंत्र का जप का पहला समय है प्रात:काल, सूर्योदय से थोड़ी देर पहले मंत्र जप शुरू किया जाना चाहिए। जप सूर्योदय के पश्चात तक करना चाहिए। दूसरा समय है दोपहर, जिस दौरान जप किया जा सकता है।

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तीसरा समय है शाम को सूर्यास्त के कुछ देर पहले, मंत्र जप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जप करना चाहिए। इन तीन समय के अतिरिक्त यदि गायत्री मंत्र का जप करना हो तो मौन रहकर या मानसिक रूप से जप करना चाहिए।

 

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