900 रु लेकर दिल्ली आया था, स्टेशन पर कचरा बीनने लगा.. आज है मशहूर अंतर्राष्ट्रीय फोटोग्राफर !

जिंदगी प्रेरणादायक

साल 1999, एक 11 वर्ष का बच्चा…जेब में मात्र 900 रूपए लिए अपने घर से जिंदगी को जीने के लिए दिल्ली की ट्रेन पकड़ भाग गया था। चाचा के पास से पैसे चुराकर अपने जीवन को समझने निकल पड़ा था अपनी उड़ान भरने…
आपने अपने घर के आस-पास कई ऐसे बच्चों को जेखा होगा जो कूड़ा कचरा बीनते रहते हैं। वेकिन हम में से शायद ही किसी ने उनके बारे में जानने की कोशिश की होगी। लेकतिन आज हम आपको एक ऐसे ही कूड़े बीनने वाले की कहानी बताने जा रहे हैं जो आज दुनिया का मशहूर फोटोग्राफर बन गया है।

बचपन में कूड़ा बीनने वाले इस मशहूर फोटोग्राफर का नाम है विकी रॉय। और उसकी किताबों से लोग फोटोग्राफी का हुनर सीखते हैं। पश्च‍िम बंगाल के पुरुलिया में जन्मा यह बच्चा एक दिन इतना मशहूर फोटोग्राफर बनेगा ये किसी ने नहीं सोचा था।

27 वर्षीय मशहूर फोटोग्राफर विक्की रॉय कोई अमीर घर का लड़का नहीं है। विक्की रॉय जब छोटे थे तो उनके माता पिता ने गरीबी के कारण विक्की को उनके नाना-नानी के घर छोड़ दिया था। उसके घर में गरीबी और मारपीट का माहौल था, इसलिए विकी घर से भाग गया। लेकिन भागने से पहले उसने अपने चाचा के 900 रुपए चुराए और रेल टिकट लेकर दिल्ली पहुंच गया।

नाना नानी के घर में विक्की के साथ अत्याचार होता था। वहां पर विकी को दिन भर काम करना पड़ता और छोटी-छोटी बातों के लिए उनके साथ मार-पीट होती थी। नाना-नानी के घर में विकी एक कैदी के समान हो गया था जबकि विक्की को घुमने फिरने का शौक था। इसलिए 1999 में मात्र 11 वर्ष की आयु में विक्की ने अपने मामा की जेब से 900 रूपए चोरी किए और घर से भाग गया।

दिल्ली आने पर वह कूड़ा बीनने वाले बच्चों के साथ मिलकर अपना गुजारा करने लगा। फिर एक रेस्टोरेंट में काम मिल गया। वहीं एक ग्राहक ने विकी को ‘सलाम बालक ट्रस्ट’ से संपर्क कराया।


इस ट्रस्ट की मदद से विकी को 6वीं क्लास में एडमिशन मिल गया और जैसे-तैसे उसने 10वीं क्लास पास कर ली। विकी ओपन लर्निंग के एक संस्था में जाता था जहां उसकी मुलाकात दो फोटोग्राफर से हुई।
दरअसल, वहां फोटोग्राफर्स बच्चों को फोटोग्राफी की ट्रेनिंग देते थे, विकी भी ये सब देखने लगा और अपनी दिलचस्पी की वजह से वह अनौपचारिक रूप से ही बहुत कुछ सीख गया। 18 साल की उम्र तक तो विक्की सलाम बालक ट्रस्ट में रहें, लेकिन इसके बाद उन्हें किराए पर मकान लेकर रहना पड़ा। इसी समय उन्होंने सलाम बालक ट्रस्ट से, B/W Nikon camera खरीदने के लिए लोन लिया। इसके लिए उन्हें हर महीने, Rs 500 किस्त के रूप में और Rs 2,500 मकान का किराया भी देना होता था। इस कारण विक्की को बड़े-बड़े होटलों में वेटर का काम करना पड़ता था, जिससे उन्होंने रोजाना Rs 250 मिल जाते थे।
फिर एक दिन साल 2004 में डिक्जी बेंजामिन सलाम बालक ट्रस्ट आए। विकी के सामने जब डिक्जी ने असिस्टेंट बनने का ऑफर रखा, तो विकी की खुशी का ठिकाना न रहा। विकी को डिक्जी ने एक कैमरा भी खरीद कर दिया। इसके बाद तो विकी के पांव जमीन पर नहीं थे।

ये दिन था और आज का दिन है, विकी ने कभी पीछे पलट कर नहीं देखा। 2007 में जब विक्की 20 वर्ष के हो गए तो उन्होंने अपनी फोटोग्राफी की पहली प्रदर्शनी लगाई। इसका नाम था ‘Street Dreams’ और उन्होंने यह प्रदर्शनी India Habitat centre में लगाई। इससे उन्हें बहुत ख्याति मिली। इसके बाद में वे लंदन, वियतनाम और दक्षिण अफ्रीका भी गए।

साल 2009 में उसे अमेरिका के ‘बाक फाउंडेशन’ के एक मेंटॉरशिप प्रोग्राम के लिए चुन लिया गया। यहां वह 6 महीने तक न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के पुनर्निमाण के कामों की फोटोग्राफी करता रहा। यहां उसने जो काम किया वह बहुत सारे अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों का हिस्सा बना।
वापस भारत आने के बाद, विक्की को सलाम बालक ट्रस्ट ने International Award for Young people  सम्मानित किया। विकी अब अपनी ही तरह आर्थ‍िक रूप से कमजोर छात्रों की मदद करते हैं और उन्हें फोटोग्राफी सिखाने का काम भी करते हैं।

इसके बाद विक्की को और भी कई सम्मान से नवाज़ गया। 2010 में, विक्की को Bahrain Indian ladies association ने young achiever from India से भी सम्मानित किया। 2011 में विक्की और उनके दोस्त Chandan Gomes ने फोटोग्राफी लाइब्रेरी बनाई और  कई अन्य प्रसिद्ध फोटोग्राफर से भी इससे जुड़ने  आग्रह किया, ताकि जो लोग पैसों की तंगी की वजह से फोटोग्राफी सम्बंधित किताबें नहीं खरीद नहीं पाते, उनकी सहायता की जा सकें। अब इस लाइब्रेरी में 500 किताबें है और विक्की समय-समय पर वर्कशॉप भी करवाते हैं।