नहीं जाएगा गांधी सेतु का मलबा बेकार, मलबे से बनेगी निर्माण सामग्री

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गांधी सेतु के मलबे से निर्माण सामग्री बनेगी। इसका उपयोग सड़क या मकान बनाने में हो सकता है, लेकिन इस सामग्री पर सरकार का मालिकाना हक नहीं होगा। निर्माण एजेन्सी या तो इसे सड़क निर्माण में लगाएगी या फिर आसपास के इलाकों में मकान बनाने वालों के हाथों बेचेगी। निर्माण एजेन्सी रीसाइ¨क्लग मशीन जल्द मंगाएगी और उम्मीद है कि दो महीने में इसका काम शुरू हो जाएगा।

गांधी सेतु का नवनिर्माण का काम करने वाली एजेन्सी के साथ सरकार का यह करार है कि सेतु को तोड़ने से निकलने वाले मलबे को न तो गंगा में गिराया जाएगा और न ही इधर-उधर फेंका जाएगा। पर्यावरण की सुरक्षा को देखते हुए एजेन्सी इसका रीसाइकिल कर ग्रेनुलर सब बेस (जीएसबी) बनाएगी। यही कारण है कि सेतु को तोड़ते वक्त पानी के फव्वारे का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि इसके धूलकण आसपास के इलाके में न फैलें।

जीएसबी को निर्माण एजेन्सी कहीं दूसरी जगह बन रही सड़क में इस्तेमाल करेगी या दूसरी सड़क निर्माण में लगी एजेन्सी के हाथों बेचेगी। आसपास के लोगों को जरूरत हो तो मकान बनवाने के लिए वे भी इसे खरीद सकते हैं। ग्रेनुलर सब बेस का इस्तेमाल सड़क निर्माण के दौरान पत्थर पीचिंग के बाद किया जाता है। मकान निर्माण में भी इसका उपयोग नींव को मजबूत करने के लिए किया जाता है।

सड़क निर्माण एजेंसी इसका निर्माण बालू और सीमेंट मिलाकर करती हैं, लेकिन यहां मलबे की रीसाइ¨क्लग के बाद स्वत: जीएसबी तैयार हो जाएगा। उसमें उतनी मात्र सीमेंट और बालू की होगी, जितनी जीएसबी में जरूरी होती है। उल्लेखनीय है कि गांधी सेतु के कंक्रीट के सुपरस्ट्रक्चर को तोड़ने का काम चल रहा है। वहां अब स्टील का सुपरस्ट्रक्चर लगाया जाएगा। लिहाजा बड़ी मात्र में कंक्रीट का मलबा एजेन्सी के पास बचेगा। उसी को एजेन्सी रीसाइकिल करेगी।

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