गलती स्कूल की भुगतेंगे बच्चे, 48 लाख बच्चों का डाटा मेधा सॉफ्ट पर अपलोड नहीं; रुक सकती हैं सुविधाएं

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बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 48 लाख छात्र छात्राओं को सरकार से मिलने वाले विभिन्न प्रकार सुविधाओं से जारी सत्र में वंचित होना पड़ सकता है। पहली कक्षा से लेकर बारहवीं तक पढ़ने वाले छात्र छात्राएं इसकी जद में हैं। इनकी उपस्थिति का आंकड़ा शिक्षा विभाग के मेधा सॉफ्ट पोर्टल पर अभी तक अपलोड नहीं किया जा सका है। इस वजह से 48 लाख छात्र छात्राओं के हिस्से की राशि पर ग्रहण लगता दिख रहा है।

इसमें प्रतिशत 75 प्रतिशत उपस्थिति की भी बाधा भी सामने आ सकती है। योजनाओं का लाभ मिलने के लिए शिक्षा विभाग ने 75% उपस्थिति को अनिवार्य किया है।  स्कूलों की ओर से अभी तक विद्यार्थियों की उपस्थिति को सत्यापित नहीं किया गया है।

दरअसल 3 नवंबर को शिक्षा विभाग के अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। समीक्षा के दौरान पाया गया कि सत्र 2020-21 में राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में पंजीकृत  विद्यार्थियों की संख्या 2.26 करोड़ है।  बिहार शिक्षा परियोजना के यूडीआई से यह आंकड़ा दर्ज है।  लेकिन सत्र 2022-23 में यह आंकड़ा मात्र 1.88 करोड़ है।  अगस्त महीने में ही राज्य के सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को इस कार्य को पूर्ण करने का आदेश पत्र लिखकर दिया गया था। लेकिन एक 31 अगस्त 2022 तक मेधा सॉफ्टवेयर 1.88 करोड़ विद्यार्थियों का आंकड़ा डाला जा सकता है। ऐसे में 48 लाख विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं पर तलवार लटक गई है । सरकारी स्कूल में छात्र छात्राओं को मुख्यमंत्री बालक बालिका प्रोत्साहन योजना, छात्रवृति योजना, पुस्तक, पोशाक साइकिल जैसी कई सुविधाएं दी जाती हैं।

शिक्षा विभाग की ओर से एक बार फिर सभी स्कूलों को शेष छात्र छात्राओं का डाटा मेधा सॉफ्ट पोर्टल पर अपलोड करने का मौका दिया गया है।  लेकिन इस काम के लिए मात्र 4 दिनों का समय दिया गया है 4 दिनों में सभी 48 लाख छात्र-छात्राओं का डाटा पोर्टल पर अपलोड कर पाएं, लगभग असंभव लगता है ।

ऐसे में सरकार अगर इसके लिए फिर एक बार तिथि नहीं पढ़ाती है तो राज्य के 48 बच्चे स्कूलों में मिलने वाली सरकारी सुविधाओं से वंचित रह जाएंगे।

 

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