अपने गांव के बच्चों को शिक्षा देने के प्रयासों के चलते एक फल-विक्रेता को भारत सरकार (Government of India) ने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक पद्म श्री (Padma Shri) पुरस्कार से नवाजा है. 71वें गणतंत्र दिवस (Republic Day) से एक दिन पहले सरकार ने इस वर्ष पद्मश्री की 21 लोगों की सूची की घोषणा की. इन लोगों में दक्षिणा कन्नड़ के हरेकला हजाबा भी शामिल थे.

संतरा बेचने वाले हजाबा जो मंगलौर के पास नयापडापू गांव के हैं. हजाबा ने कभी खुदकोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली है. जबकि उन्होंने अपने गांव के बच्चों के लिए एक स्कूल शुरू किया है.

प्रवीण कस्वां नाम के एक IFS अधिकारी ने ट्विटर पर यह खबर साझा करते हुए लिखा कि- “दक्षिण कन्नड़ के फल विक्रेता हजाबा एक दशक से अपने गांव न्यूपडापू में एक मस्जिद में गरीब बच्चों को पढ़ाते हैं.”


प्रवीण ने आगे लिखा कि, हजाबा को जब अधिकारियों ने सूचना दी कि उन्हें पद्मश्री मिला है तो वह उस समय एक राशन की दुकान पर लाइन में खड़े थे.

इस तरह मिली स्कूल खोलने की प्रेरणा
खबरों के मुताबिक, हजाबा ने खुलासा किया कि यह एक बार दो विदेशी पर्यटकों के साथ उनका वास्ता पड़ा जिन्होंने पहली बार उन्हें स्कूल खोलने के लिए प्रेरित किया.

विदेशी दंपति ने हजाबा से अंग्रेजी में एक संतरे की कीमत पूछी थी. विदेशी भाषा बोलने में असमर्थ हजाबा उन्हें इसकी कीमत नहीं बता पाए. जिसके बाद दंपति कोई बात किए बिना ही वहां से चले गए. इस घटना से आहत, हजाबा ने अंग्रेजी सीखने और अपने स्कूल के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के अवसर मुहैया कराने का फैसला किया ताकि किसी और को ऐसी परिस्थिति का सामना न करना पड़े.

न्यूज़ मिनट से बात करते हुए, उन्होंने कहा, “मुझे एहसास हुआ कि संचार किस तरह से जीवन में प्रगति करने में मदद कर सकता है, और लोगों को एक साथ ला सकता है.”

बचत के पैसों से खोला स्कूल
बीबीसी के मुताबिक, हज़बा के गांव में साल 2000 तक का स्कूल नहीं था, उन्होंने अपनी मामूली कमाई से पैसे बचाकर वहां स्कूल खोला. जैसे-जैसे छात्रों की संख्या बढ़ती गई, उन्होंने ऋण भी लिया और अपनी बचत का इस्तेमाल स्कूल के लिए जमीन खरीदने में किया.



महज 150 रुपये प्रति दिन कमाने वाले हजाबा को स्थानीय लोगों और अधिकारियों से बहुत कम सहयोग मिला, लेकिन उनके दृढ़ संकल्प से 28 छात्रों के साथ एक प्राथमिक विद्यालय खोला. साल दर साल छात्रों की ये संख्या बढ़ती गई. हजाबा को ऋण के लिए आवेदन करना था, स्कूल परिसर को बच्चों के लिए पानी उबालना और खुद से विभिन्न अन्य गतिविधियों का संचालन करना था.

लेकिन अपने स्थानीय अधिकारियों के संयुक्त प्रयासों को तब प्रोत्साहन मिला जब शनिवार को उन्हें गृह मंत्रालय की ओर से फोन पर जानकारी मिली कि हजाबा को पुरस्कृत किया जा रहा है.

Sources:-News18.com

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