freedom fighters story

कभी जिस freedom fighter ने बम से उड़ा दिए थे अंग्रेजों के कई जहाज, आज रोड पर रहने को मज़बूर परिवार

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Freedom fighter का बेटा रेलवे स्टेशन पर लिट्टी बेचकर अपने परिवार के साथ गुजर-बसर कर रहा है। बीपीएल सूची में नाम तो है, पर आज तक कोई सरकारी सुविधा नहीं मिली। दफ्तरों का चक्कर काटते-काटते जब थक गए तो स्टेशन पर लिट्टी की दुकान खोल ली, जिससे परिवार का पेट चल सके।

स्वतंत्रता सेनानी कैलाशपति उर्फ केवल राम सदर प्रखंड के जम्होर के रहने वाले थे। इनका पुत्र अर्जुन सिंह फिलहाल औरंगाबाद के अनुग्रह नारायण स्टेशन परिसर में लिट्टी का दुकान चला रहा है।

लिट्टी से इतनी आमदनी नहीं होती, जिससे कि परिवार का गुजारा हो जाए। लेकिन उम्र अन्य कोई रोजगार करने की इजाजत नहीं देती। लिहाजा freedom fighter का परिवार किसी तरह से जिंदगी गुजारने को विवश है। स्वतंत्रता सेनानी के चार बेटों में से एक की मौत हो गई।




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फिलहाल तीन बेटे जम्होर में ही रहते हैं। अर्जुन लिट्टी की दुकान पर निर्भर है। वहीं दूसरे गोपाल आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। एक ड्राइवर हैं। अर्जुन का उम्र करीब 68 साल है। उससे एक बड़े भाई गोपाल सिंह 75 साल के हैं। ऐसे में यदि वृद्धा पेंशन मिल जाती तो इन्हें कुछ मदद मिलती।




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लेकिन आज तक इन दोनों को वृद्धा पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है। गरीबी रेखा के नीचे हैं। हालांकि यह सुविधा सभी सामान्य वृद्धों को दी जाती है। वृद्धा पेंशन का लाभ नहीं दिया जा रहा।









जम्होर के एक साधारण परिवार में रहने वाले स्वतंत्रता सेनानी कैलाशपति उर्फ केवल राम जम्होर के अपने कुछ साथियों के साथ 1930 के नमक आंदोलन में शामिल होने कोलकाता चले गए थे।

जहां समुद्री बंदरगाह पर खुद को भिखारी के वेश धारण कर अंग्रेजों के कई जहाजों को उड़ा दिया था। इसके साथ-साथ अंग्रेजों को पश्चिम बंगाल में नाको चना चबवाया था, जिसके कारण कैलाश व उनके साथियों को फोटो अंग्रेज अफसरों ने चस्पा कर धर-पकड़ की मुहिम तेज कर दी थी।




कैलाश अपने साथियों के साथ कोलकाता से गया आ गए। वहां नाम बदलकर कैलाश से केवल बन गए। यहां वेश बदलकर दिन में चालक का काम और रातों को साथियों के साथ अंग्रेजों को निशाना बनाते थे।

लेकिन यह सब बहुत दिनों तक नहीं चला और कैलाश को उसके घर से अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद हजारीबाग के जेल में उन्हें छह माह तक रहना पड़ा। उनके साथ इसी गांव के चार अन्य freedom fighter भी शामिल थे।




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