राम नगरी की दीपावली को भव्य मनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार इस बार यहां 4 लाख दीये प्रज्ज्वलित कराएगी। दीये खरीद का टेंडर सोमवार को खुलेगा। लेकिन, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी प्रशासन के मौखिक आदेश पर शहर से सटे जयसिंहपुर गांव के 40 कुम्हार परिवार मिट्‌टी के 4 लाख दीपक बनाने में जुट गए हैं। इसके लिए इन्हें 85 पैसे प्रति दीपक के हिसाब से भुगतान किया जाएगा, जो बीते सालों में मिले दाम से कम हैं।

दीपक बनाने में जुटे कुम्हार परिवार के सदस्यों ने बताया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने ऐसे दीये बनाने को कहा है, जिसमें 30 मिली तेल भर सके। यहां के पांच कुम्हारों को सरकार ने इलेक्ट्रिक चाक दिया है, बाकी ने अपनी छोटी मशीनों के चाक पर दीये बनाना शुरू कर दिए हैं। कई लोग तो पारंपरिक चाक पर ही दीये तैयार कर रहे हैं।

14 अक्टूबर को खुलेगा दीये का टेंडर
दीये के लिए टेंडर 14 अक्टूबर को खुलेगा। लेकिन, जिस-जिस कुम्हार को पिछले साल के दीपोत्सवों में ढाई लाख दीपों को सप्लाई करने की जिम्मेदारी दी गई थी। उसे इस साल भी 4 लाख दीये तैयार करने को कहा गया है। अवध यूनिवर्सिटी के मौखिक आदेश पर इस गांव के 40 परिवार रात दिन दीये तैयार करने में जुटे हुए हैं। दीये बनाने में जुटे विनोद ने बताया 20 अक्टूबर तक दीपक तैयार करके अवध यूनिवर्सिटी को सप्लाई करना है।

मोदी और योगी की तारीफ
जयसिंहपुर के प्रजापति परिवार के लोग दीपोत्सव के आयोजन को लेकर मोदी व योगी सरकार की तारीफ कर रहें है। साथ ही यह भी कह रहें हैं कि उनका परिवार तीन साल पहले गांव के लोग अपनी कुम्हारी कला को छोड़कर मेहनत मजदूरी करने के लिए बाहर के शहरों की ओर पलायन कर रहे थे। अब वे अपने पुश्तैनी पेशे को अपनाने के लिए वापस आ रहे हैं। पढ़े लिखे युवा भी अब एक मुश्त काम मिलने के कारण पुश्तैनी पेशे से जुड़ रहे हैं।

नहीं मिली इलेक्ट्रिक चाक व मशीनें
जयसिंह गांव के सीताराम का कहना है कि 20 हजार दीये उन्हें तैयार करने हैं, जिसमें से 12 हजार दीये तैयार कर लिए हैं। बाकी भी समय से तैयार कर लेगें। अभी कच्चे दीयों को पकाने का काम बाकी है। अब तक गांव में 3 लाख से ज्यादा दिये तैयार किए जा चुकें है। सभी कुम्हारों को प्रशासन ने इलेक्ट्रिक की आधुनिक मशीन व चाक देने का आश्वासन दिया था, लेकिन गांव के केवल पांच कुम्हारों को ही यह आधुनिक चाक मिले है।

रोजगार के अवसर बढ़े
सरकार ने इस गांव में कुम्हारों के रोजगार को बढ़ाया है। मुफ्त में मिट्टी प्रशासन ने दी है। गांव के राजू अब अपनी पढ़ाई छोड़कर कुम्हारी कला को रोजगार के तौर पर अपना चुके है। उनका कहना है ‘अब अपनी पुश्तैनी कला को आधुनिक बनाने के लिए ट्रेनिंग करना चाहता हूं। इससे नए व आधुनिक प्रोडक्ट तैयार कर सकूं।’ रेशमा कहती हैं कि उन्हें अपने परिवार के पुश्तैनी पेशे को अपनाने मे कोई शर्म नहीं है। वह खिलौनों के अलावा अन्य मिट्टी के खूबसूरत बर्तन तैयार कर इसे अपने रोजगार का साधन बनाना चाहती हैं।


हर साल घटते गए रेट
2017 में 2 लाख 40 हजार दीये इस गांव के कुम्हारों ने सप्लाई किए थे। जिस पर 140 रुपए प्रति सैकड़ा की दर से भुगतान मिला था। 2018 में 2 लाख 50 हजार दियों की सप्लाई की, जिसका आकार घटा दिया गया था। पिछले साल 125 प्रति सैकड़े के हिसाब से रेट दिया गया था। इस साल 4 लाख दीप तैयार करने को कहा गया है। जिसका रेट अभी बताया गया है। चर्चा है कि 85 पैसे प्रति दीपक के हिसाब भुगतान मिलेगा।

Sources:-Dainik Bhasakar

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