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बाढ़ से बिहार में तबाही जारी, अब तक 273 की मौत

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PATNA : बिहार की अधिकतर नदियों का जलस्तर कम तो हो रहा, लेकिन हफ्तेभर से बेहाल बाढ़ पीडि़तों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। राज्य के 17 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। गोपालगंज में स्थिति गंभीर होने पर सेना की मदद मांगी गई।

बाढ़ से अबतक 1.08 करोड़ लोग प्रभावित हो चुके हैं, वहीं 273 लोगों की जानें चली गईं हैं। हालांकि आपदा प्रबंधन विभाग का दावा अभी 153 के मरने का है। अब तो सांप काटने से भी मौतें होने लगी हैं।



पटना में पुनपुन नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। प्रति घंटा पांच सेंटीमीटर की रफ्तार से जलस्तर बढ़ रहा है। पुनपुन घाट पर जलस्तर 51.50 मीटर हो गया है, जबकि खतरे का निशान 49.50 मीटर है। गंगा के जलस्तर में भी वृद्धि हुई है। दीघा से सटी बस्ती बिंद टोली जलमग्न है। जिलाधिकारी संजय कुमार अग्रवाल ने पुनपुन का जलस्तर बढऩे पर हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

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पीडि़तों की परेशानियों को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राहत सामग्रियों के सघन वितरण का निर्देश दिया है। अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करके सीएम ने किशनगंज से बहादुरपुर होकर अररिया जाने वाली सड़क को रातों-रात ठीक करने का निर्देश दिया है। यह सड़क राहत कार्य चलाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।



कृषि विभाग के प्रधान सचिव को विशेष प्रमंडलीय आयुक्त बनाकर पूर्णिया भेजा गया है। मुख्यमंत्री खुद 21 अगस्त को सभी संबंधित विभागों के साथ राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा करेंगे। कोसी के कटाव से घबराए गोगरी प्रखंड के ग्रामीणों ने बाढ़ नियंत्रण अधिकारियों को लापरवाही बरतने का आरोप लगाकर आधे घंटे तक बंधक बना लिया। इनमें फ्लड कंट्रोल अध्यक्ष, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता व सहायक अभियंता भी शामिल हैं।

पानी घटा, कटाव बढ़ा

गंडक के जलस्तर में कमी आई है। फिर भी धनहा गौतम बुद्ध सेतु के निचले हिस्से में दबाव बना हुआ है। पूर्वी चंपारण में मोतिहारी-पकड़ीदयाल मार्ग पर आवागमन बंद है। जोगबनी से फारबिसगंज तक रेल व सड़क मार्ग बंद है। खगडिय़ा में बागमती और कोसी का पानी थोड़ा कम हुआ है। फिर भी दोनों नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।



राहत शिविरों में अव्यवस्था

राहत शिविरों की अव्यवस्था भी सामने आ रही है। न पेयजल है, न ही बच्चों के लिए दूध। तीन लाख आबादी वाला टेढ़ागाछ प्रखंड अभी भी प्रशासन की पहुंच से दूर है। सेना के जवानों द्वारा हेलीकॉप्टर से राहत सामग्री गिराई गई है। कटिहार के एक शिविर में पीडि़तों व पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। इसके विरोध में पीडि़तों ने सड़क जाम कर दिया। सीतामढ़ी के रुन्नीसैदपुर में पीडि़तों का सर्वेक्षण करने पहुंचे कर्मियों को मारपीट कर बंधक बना लिया गया।



गोपालगंज के हालात भयावह

गोपालगंज में बाढ़ की स्थिति अभी भी विकराल है। बचाव के लिए सेना बुला ली गई है। दो दर्जन नए गांवों में गंडक का पानी फैल गया है। सिधवलिया प्रखंड मुख्यालय भी बाढ़ की चपेट में आ गया है। बैकुंठपुर, कुचायकोट तथा सदर प्रखंड में पानी घटा है, लेकिन छपरा जिले के छह प्रखंड भी पानी से घिर गए हैं। कटिहार से गुजरने वाली तीनों बड़ी नदियों का जलस्तर शुक्रवार को भी खतरे के निशान से ऊपर है। महानंदा, कोसी और गंगा का तेवर थोड़ा कम जरूर हुआ है, किंतु खतरे नहीं। मनिहारी और अमदाबाद में पानी तेजी से फैल रहा है।



बिहार मांगेगा केंद्र से मदद

बाढ़ से तबाही और क्षति की भरपाई के लिए बिहार केंद्रीय मदद की मांग करेगा। आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी संबंधित विभागों से नुकसान की रिपोर्ट मांगी है। इसी के आधार पर ज्ञापन तैयार किया जाएगा, जिसे गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा। इसके बाद केंद्रीय टीम बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करेगी। अभी सेटेलाइट के जरिए बाढ़ प्रभावित इलाकों की तस्वीरें ली जा रही हैं।

प्रभावित जिले 17

किशनगंज, कटिहार, अररिया, पूर्वी एवं पश्चिमी चंपारण, मधुबनी, पूर्णिया, सुपौल, मधेपुरा, सीतामढ़ी, सारण, दरभंगा, शिवहर, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, सहरसा, खगडिय़ा।

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