मछलियां करेंगी बिहार को मालामाल, पूरा देश खाएगा यहां की मछली

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 बिहार में मछली उत्पादन को बढावा दिया गया तो यह पूरे देश को मछली खिला सकता है।बिहार पूरे देश को मछली खिला सकता है। यहां मीठाजल का क्षेत्र बहुत अधिक है। राज्य में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए पहले दो रोड मैप पर काम किया गया था।  अब तीसरा कृषि रोड मैप फाइनल किया जा रहा है। पशु व मत्स्य संसाधन सचिव डॉ. एन विजयलक्ष्मी ने ये बातें कहीं। शनिवार को वे बामेती में राष्ट्रीय स्तर मछली पालन नीति बनाने के लिए आयोजित कार्यशाला में उन्होंने कहा कि तालाब बनाने से लेकर मछलीपालन के लिए अनुदान दिया जा रहा है।

कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए मात्स्यिकी, पशुपालन व गव्य के केंद्रीय संयुक्त सचिव एके जोशी ने कहा कि देश में नीली क्रांति के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनानी है। मछलीपालकों की आय बढ़ाने के साथ ही जीडीपी में इसकी अधिक भागीदारी बढ़ानी है। आज देश में इनलैंड क्षेत्र (तालाब, नदी, आदि) में 65प्रतिशत मछली उत्पादन हो रहा है, जबकि समुद्री क्षेत्र में 35 प्रतिशत मछली उत्पादन हो रहा है।
उन्होंने पिछले कुछ वर्षों से बिहार में मछली उत्पादन बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे कार्य की सरहना की। राष्ट्रीय नीति बनाने के लिए इसके पहले गोवाहटी और हिमाचल प्रदेश सहित तीन जगहों पर पहले इस पर कार्यशाला हो चुकी है। देश में सभी जलक्षेत्रों में मछलीपालन के लिए ऐसी नीति बनायी जाएगी, जिससे मछलीपालकों की आय पांच साल में दोगुनी हो। नेशनल इंलैंड फिशरीज एंड एक्वाकल्चर पॉलिसी कमेटी के अध्यक्ष डॉ. दिलीप कुमार ने कहा कि मछली में उच्च स्तरीय प्रोटीन है, जो कुपोषण दूर करने में सहायक है।

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