सीमांचल का किशनगंज जिला शिक्षा के बाद अब कृषि के क्षेत्र में नया आयाम लिख रहा है। चाय, अनानास के लिए प्रसिद्ध इस जिले में किसानों ने विदेशी फल ड्रेगन फु्रट की खेती शुरु की तो इसकी प्रसिद्धि और बढ़ गई। अब यहां के किसान पान का उत्पादन कर बंगाल के बाजार में भेजेंगे।

मिथिलांचल में प्रसिद्ध पान, मखान और माछ के बाद अब सीमांचल भी इस ओर बढ़ रहा है। इसे साकार करने में जुटे हैं ठाकुरगंज की डुमरिया पंचायत के चापाती गांव के दस किसान। इन किसानों के खेतों में पान के हरे पत्ते लहलहाते देख लोगों में खुशी है। पहले महेशखूंट, नवगछिया, बंगाल के इस्लामपुर सहित अन्य जिलों से पान के पत्ते पर यहां के पान दुकानदार और व्यावसायी निर्भर रहते थे। अब यहां उत्पादन बढ़ेगा तो दुकानदारों को लागत भी कम आएगी। किसान भी समृद्ध बनेंगे। यहां के किसान पूर्व से खेती कर रहे हैं लेकिन इनके पान की खेती चर्चा में तब आई जब जल जीवन हरियाली यात्रा के क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार किशनगंज पहुंचे। सीएम के ठाकुरगंज प्रखंड के भातडाला में आयोजित कार्यक्रम में कृषि विभाग के स्टॉल में पान की खेती दर्शाई गई थी।

क्या कहते हैं किसान
पान उगाने वाले किसान संजीव कुमार मंडल ने बताया कि बंगाल में बिहार की तुलना में प्रति थापी 10 रुपये अधिक कीमत मिलती है। एक थापी में 64 पान का पत्ता होता है जो बिहार में 64 रुपये में बिकता है जबकि बंगाल के इलाकों में 74 से 80 रुपये में बिकता है।

क्या कहते हैं कृषि अधिकारी 
जिला कृषि पदाधिकारी संतलाल साह ने बताया कि जिले के ठाकुरगंज प्र्रखंड के दस किसान पान की खेती कर रहे हैं। पान की खेती के लिए इस जिले में विभाग की ओर से अनुदान का कोई प्रावधान नहीं है। सहायता के लिए विभाग को लिखा जाएगा। 

Sources:-Hindustan

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