बाढ़ के बाद भी बिहार में 75 लाख टन धान उत्पादन का अनुमान

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पटना : उत्तर बिहार के 19 जिलों में बाढ़ से खेती बर्बाद होने के बाद भी इस वर्ष 75 लाख टन धान उत्पादन की उम्मीद है। राज्य में फसल उत्पादन से संबंधित प्रथम आकलन रिपोर्ट में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 लाख टन कम उपज का अनुमान लगाया गया है। उत्तर बिहार के बाढ़ से फसल नुकसान की भरपाई दक्षिण और मध्य बिहार से होती दिख रही है। हालांकि इस माह के मध्य में एक बारिश और हो गई तो धान की बंपर उपज मिल जाएगी। बाढ़ के बाद खेतों से पानी निकल जाने के बाद उत्तर बिहार में भी उत्पादन हो जाएगा।

इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में एक लाख हेक्टेयर में अधिक धान की रोपनी हुई है। बिहार में मानसून भी अब तक बेहतर माना जा सकता है। जुलाई में 11 प्रतिशत और अगस्त में 18 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। एक जून से 26 सितंबर तक राज्य में 17 प्रतिशत कम बारिश हुई।भोजपुर, बक्सर, सहित शाहाबाद क्षेत्र के साथ ही बांका, भागलपुर आदि इलाकों में भी धान की बेहतर धान की फसल है। उत्तर बिहार के पूर्वी और पश्चिम चंपारण में भी बाढ़ का असर था, लेकिन यहां भी धान की फसल ठीक है।

राज्य में इस वर्ष 34.44 लाख हेक्टेयर में धान रोपनी का लक्ष्य था, जबकि रोपनी 34.18 लाख हेक्टेयर में हुई। उत्पादन 95.20 लाख टन का लक्ष्य रखा गया है। हरी खाद के लिए किसानों को ढैंचा के बीज अनुदानित दर पर दिए गए थे। प्रति एकड़ किसान को धान की सीधी बुआई पर 3000 रुपए अनुदान दिए गए।राज्य के 19 जिलों में लगभग 7 लाख हेक्टेयर में धान की खेती बाढ़ से प्रभावित हुई है। कृषि विभाग ने एक करोड़ करोड़ के खेती से नुकसान का आकलन केंद्र सरकार को दिया है।

राज्य सरकार ने डीजल अनुदान के लिए 90 करोड़ की राशि जिलों में भेज दी है। कृषि विभाग ने अपने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जहां अपेक्षा से कम बारिश हुई है, वहां किसानों को डीजल मशीन से सिंचाई के लिए प्रेरित करें। किसानों को बिचड़ा लगाने से रोपनी और फसल तैयार होने तक 5 सिंचाई के लिए डीजल सब्सिडी की व्यवस्था है। प्रति एकड़ 30 रुपए प्रति लीटर की दर से 10 लीटर के लिए 300 रुपए डीजल सब्सिडी एक सिंचाई के लिए देने का प्रावधान है। यानी पांच सिंचाई पर 1500 रुपए दिए जाएंगे।

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