इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ अनुज मशरूम का कर रहे उत्पादन, सैलरी से 3 गुणा अधिक है मुनाफा

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अब हर युवा आत्मनिर्भर होना चाहता है. इसमें कई सफल होकर दूसरों के लिए मिशाल कायम कर रहे हैं. इसके लिए युवा बड़ा से बड़ा रिस्क ले रहे हैं. इसमें एक नाम नालंदा के युवक अनुज का है. वह इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर बटन मशरूम का व्यवसाय शुरू कर दुगना मुनाफा कमा रहे हैं.

युवक कुमार अनुज बिहार शरीफ के प्रोफ़ेसर कॉलोनी के रहने वाले हैं. अनुज ने न्यूज़ 18 लोकल से बात करते हुए बताया कि वह एनटीआरआई कैनाल से बीटेक इंजीनियरिंग डेयरी एक्सट्रीम से किया था और उसके बाद अमूल कंपनी में 5 साल तक नौकरी की. जिसका सलाना पैकेज 4.8 लाख़ रुपए था. जिसमें उन्होंने 5 साल नौकरी की. फिर अपनी जमा पूंजी से एमबीए की पढ़ाई की. उसी दौरान उन्होंने वहां खाने के लिए मशरूम अपने इस्तेमाल के लिए लिया. फिर वहीं से इसकी जर्नी शुरू हुई.

आइये अब जानते हैं अनुज की कहानी…
अनुज ने बताया की मशरूम लेने के बाद जब घर आया. फिर बगल में पूछा तो रेट में काफी फर्क नजर आया. उसके साथ ही जॉब का प्रेशर को देखते हुए एमबीए पढ़ाई पूरी की. मशरूम का व्यवसाय करने के लिए सोचा फिर डेढ़ साल पहले अपने रैती जमीन पर शुरू किया. इसके लिए 55 लाख खर्च आया है. जिसमें 3 लाख रुपए के बटन मशरूम से इसकी शुरुआत की. जिसमें पहली उपज में पूंजी से आधा फायदा हुआ.

इसके बाद इसकी जानकारी लोगों को मिली. दूसरे बार में दो से ढाई गुना अधिक फायदा हो रहा है. इसमें खुदरा ₹ 200,  होलसेल ₹ 175kg और ऑयस्टर ₹100/kg बिकता है. यहां प्रतिदिन 50 केजी मशरूम निकलता है.

बटन मशरूम का है दूसरा यूनिट, सालों भर होगा तैयार
आपको बता दें कि नालंदा जिले में बटन मशरूम का यह दूसरा यूनिट है. जिले में आयस्टर मशरूम की खेती ज्यादा किसान करते हैं. इसकी डिमांड जिले में ज्यादा है. इसके साथ ही बटन मशरूम यहां दूसरे जिले से मंगवाया जाता था. जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद बताया जाता है. यह बिहार शरीफ मुख्यालय से 7 किमी दूर स्थित अस्थावां प्रखंड के मुस्तफापुर गांव में दूसरी यूनिट बिठाया. जो अत्याधुनिक के साथ वातानुकूलित है. जहां सालों भर बटन मशरूम तैयार किया जाएगा.

इससे पहले जिले के नूरसराय प्रखंड के परासी गांव में पहला यूनिट स्थापित किया गया था. खास बात यह है कि ढाई महीने में एक हजार किलो बटन मशरूम का उत्पादन किया गया है. जबकि अस्थावां के मुस्तफापुर वाले यूनिट में 15 महीने में साढ़े 4 से 5 हज़ार किलो बटन मशरूम का उत्पादन हुआ है. इसके जानकार बताते हैं कि जिले में बटन मशरूम का उत्पादन कम है, जिसकी वजह से दूसरे जिले से मंगवाया जाता है.

कुछ इस तरह से बनाया गया स्ट्रक्चर
दूसरा यूनिट खुलने की वजह से दूसरे जिले की निर्भरता कम हुई है. यूनिट की खासियत यह है कि 22 बाय 25 फीट के दो कमरे हैं. दोनों कमरों में 5.5 टन का एसी के साथ पैकिंग स्टोर और ऑफिस बनाया गया है. निर्बाध बिजली के लिए 30 केवी का जेनरेटर लगाया ताकि बिजली की समस्या उत्पन्न न हो.

आयस्टर मशरूम को उपजने में 15 से 20 दिन लगता है. जबकि बटन मशरूम के उत्पादन में 45 से 60 दिन का वक्त लगता है. बटन प्रजाति के मशरूम की खेती के लिए 16 से 22°¢ टेंपरेचर चाहिए. इसके साथ ही जाड़े का मौसम मशरूम की खेती के लिए ज्यादा बेहतर होता है.

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