इस बिहारी नेता ने कभी ली थी इंजीनियरिंग की डिग्री, आज इनको पूरा देश कहता है सोशल इंजीनियरिंग का जादूगर

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देश के फेमस राजनेता और बिहार के सीएम नीतीश कुमार मैकेनिकल इंजीनियर हैं। बिहार की राजनीति में चाणक्य नाम से मशहूर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंझे हुए राजनेता हैं। सोशल इंजीनियरिंग के जादूगर नीतीश कुमार ने सुशासन के मुद्दे पर पिछला चुनाव लड़कर बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल की थी।

नीतीश कुमार अब तक तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री होने का गौरव प्राप्त कर चुके हैं। विचारों से समाजवादी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार काफी सुलझे हुए नेता माने जाते हैं। मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने एनडीए से काफी पुराना नाता तोड़ लिया था।

नीतीश कुमार इस बार के लोकसभा चुनाव में अपने लिए उपयुक्त संभावनाएं तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। बिहार के पटना इंजीनियरिंग कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले नीतीश कुमार का जन्म साल 1951 में बिहार के एक गरीब परिवार में हुआ था।

उन्होंने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (अब NIT) पटना से डिग्री ली थी। नीतीश पढ़ाई के बाद बिहार इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में कुछ दिन नौकरी भी कर चुके हैं। नीतीश का उपनाम मुन्ना है। नीतिश के पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे। नीतीश ने राजनीति के गुण जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया, कर्पूरी ठाकुर और जॉर्ज फर्नाडीज से सीखे थे। नीतीश ने 22 फरवरी 1973 को पेशे से इंजीनियर मंजू कुमारी सिन्हा से शादी की थी।

नीतीश कुमार का एक पुत्र है जो बीआईटी से ग्रेजुएट है। नीतीश का उपनाम मुन्ना है। नीतीश के राजनीतिक करियर की शुरूआत साल 1977 में हुई थी। इस साल नीतीश ने जनता पार्टी के टिकट पर पहला विधानसभा चुनाव लड़ा। साल 1985 को नीतीश बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए।

नीतीश का राजनीतिक कद धीरे धीरे बढ़ता जा रहा था। इसी बीच साल 1987 को नीतीश कुमार बिहार के युवा लोकदल के अध्यक्ष बन गए। नीतीश राजनीति में पारंगत हो ही रहे थे कि साल 1989 को नीतीश कुमार को जनता दल (बिहार) का महासचिव बना दिया गया। अब तक नीतीश ने अच्छी -खासी राजनीतिक पहचान बना ली थी।

साल 1989 नीतीश के राजनीतिक करियर के लिए काफी अहम था। इस साल नीतीश 9वीं लोकसभा के लिए चुने गए। लोकसभा के लिए ये नीतीश का पहला कार्यकाल था। इसके बाद साल 1990 में नीतीश अप्रैल से नवंबर तक कृषि एवं सहकारी विभाग के केंद्रीय राज्य मंत्री रहे। नीतीश का राजनीतिक कद लगातार बढ़ता जा रहा था। साल 1991 में दसवीं लोकसभा का चुनाव हुए नीतीश एक बार फिर से संसद में पहुंचे।

इसी साल नीतिश कुमार जनता दल के महासचिव बने और संसद में जनता दल के उपनेता भी बने। करीब दो साल बाद 1993 को नीतीश को कृषि समित का चेयरमैन बनाया गया। एक बार फिर से आम चुनाव ने दस्तक दी। साल 1996 में नीतीश कुमार 11वीं लोकसभा के लिए चुने गए। नीतीश साल 1996–98 तक रक्षा समिति के सदस्य भी रहे। साल 1998 ने नीतीश फिर से 12वीं लोकसभा के लिए चुने गए।

1998-99 तक नीतीश कुमार केंद्रीय रेलवे मंत्री भी रहे। एक बार फिर चुनाव हुए साल 1999 में नीतीश कुमार 13वीं लोकसभा के लिए चुने गए। इस साल नीतीश कुमार केंद्रीय कृषि मंत्री भी रहे। साल 2000 नीतीश के राजनीतिक करियर का सबसे अहम मोड़ था। इस साल नीतीश कुमार पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने।

उनका कार्यकाल 3 मार्च 2000 से 10 मार्च 2000 तक चला। साल 2000 में नीतीश एक बार फिर से केंद्रीय कृषि मंत्री रहे। साल 2001 में नीतीश को रेलवे का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। साल 2001 से 2004 तक नीतीश केंद्रीय रेलमंत्री रहे। साल 2002 के गुजरात दंगे भी नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान हुए थे।

साल 2004 में नीतीश 14वीं लोकसभा के लिए चुने गए। साल 2005 में नीतीश कुमार एक बार फिर से मुख्यमंत्री बने। बतौर 31वें मुख्यमंत्री नीतीश का ये कार्यकाल 24 नवंबर 2005 से 24 नवंबर 2010 तक चला। 26 नवंबर 2010 को नीतीश कुमार एक बार फिर से मुख्यमंत्री बने।

2015 में महागठबंधन की सरकार में वो फिर मुख्यमंत्री बने। हालांकि ये सरकार डेढ़ साल के अंदर गिर गई। इसके बाद नीतीश कुमार ने एक बार फिर एनडीए का दामन थाम लिया और जुलाई में इनके सिर पर फिर से मुख्यमंत्री का ताज सजा।

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