एक बिहारी ऐसा भी जिसका बचपन में था अंग्रेजी जीरो आज उसी के ऐप से सीख रही है दुनिया,गर्व है।

कही-सुनी

हाईस्कूल तक तो अंग्रेजी छकाती रही थी, लेकिन अंकित राज ने भी हार नहीं मानी। अंग्रेजों की मातृभाषा में निपुण होने की प्रतिबद्धता के साथ ऐसे जुटे कि आज उनके बनाए एप से देश-दुनिया के लोग अंग्रेजी सीख रहे। अंकित की मानें तो दिल्ली के सरकारी विद्यालयों में बच्चों को जल्‍द ही इस एप से अंग्रेजी सिखाई जाएगी।

बनाया एल्सा नामक एप
रोहतास जिला में संझौली प्रखंड के सुदूर ग्राम छुलकार के रहने वाले 26 वर्षीय अंकित राज पेशे से इंजीनियर हैं। उन्होंने अंग्रेजी सीखने का मोबाइल एप एल्सा (इंग्लिश लैंग्वेज स्पीच ऑफ एस्ट्रीटेंट) बनाया है, जो काफी लोकप्रिय हो चुका है।

गूगल से जुड़कर बनाया एप
पिता रविंद्र कुमार सिंह संझौली के बीडीसी सदस्य रह चुके हैं। मां अनीता देवी शिक्षिका हैं। डालमियानगर स्थित मॉडल स्कूल से साइंस में इंटरमीडिएट करने के बाद बेंगलुरु से इंडियन इंस्टीट््यूट ऑफ साइंस से ग्रेजुएट हुए। 2015 में याहू व बोकल में नौकरी भी की, पर कुछ अलग करने की चाहत से वे गूगल के साथ जुड़ गए और एल्सा के प्रारूप से गूगल को अवगत करा उस पर काम शुरू किया। पिता रङ्क्षवद्र ङ्क्षसह बताते हैं, अंकित को बचपन में अंग्रेजी बिल्कुल नहीं आती थी। आज बेटे की उपलब्धि पर पूरे परिवार को गर्व होता है।

70 लाख लोगों ने इस एप को अपनाया
दुनियाभर के 70 लाख लोगों ने एल्सा एप को अपनाया है। 10 लाख से अधिक लोग एल्सा की मदद से अपने कॅरियर को बेहतर बना चुके हैं। भारत में अब तक एल्सा नौ लाख लोगों को अंग्रेजी सिखा चुका हे। अंकित का उद्देश्य है कि वह अपने क्षेत्र व राज्य के बच्चों को अधिक से अधिक जोड़कर उनकी अंग्रेजी पर पकड़ को मजबूत बनाएं। वे अपने गृह जिला रोहतास के 3000 से अधिक बच्चों को एल्सा से जोड़ चुके हैं।

कहते हैं अंकित
अंकित कहते हैं, इस एप से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से भी सरकारी विद्यालयों में बच्चों को अंग्रेजी सिखाने की बात कही गई है। बताते हैं, कड़े परिश्रम के बाद एल्सा बनाने में सफलता मिली। उन्होंने फ्रांस के हावियर, वियतनाम के बू और टीया के साथ मिलकर 2018 में इस एप को बनाया।

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